ओम बिरला का बड़ा बयान: आधुनिक तकनीक से विधायिका बनेगी अधिक प्रभावी और पारदर्शी

पीठासीन अधिकारी सम्मेलन को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि तकनीक और क्षमता-वृद्धि के माध्यम से देश की विधायिकाओं को और अधिक मजबूत, प्रभावी तथा उत्तरदायी बनाया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए विधायिका की कार्यप्रणाली का आधुनिक होना अत्यंत आवश्यक है। आज के डिजिटल युग में तकनीकी नवाचारों को अपनाकर न केवल विधायी कार्यों की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है, बल्कि जनता का विश्वास भी और गहरा किया जा सकता है।
ओम बिरला ने कहा कि ई-विधान, डिजिटल दस्तावेज़ीकरण, ऑनलाइन प्रशिक्षण और डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली जैसी पहलें विधायकों की दक्षता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। तकनीक के माध्यम से सदन की कार्यवाही अधिक पारदर्शी होगी, जिससे आम नागरिकों को भी विधायी प्रक्रियाओं की बेहतर जानकारी मिल सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से समय और संसाधनों की बचत होती है, जिसका उपयोग जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर किया जा सकता है।
सम्मेलन में उन्होंने विधायकों और सदन के अधिकारियों की क्षमता-वृद्धि पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि नियमित प्रशिक्षण, शोध आधारित कार्यप्रणाली और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन विधायिका को अधिक सशक्त बना सकता है। इससे नीतियों के निर्माण में गुणवत्ता आएगी और कानून अधिक व्यावहारिक व जनोन्मुखी बनेंगे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि युवा विधायकों को तकनीकी कौशल से लैस करना भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप है।
ओम बिरला ने सदन की गरिमा और अनुशासन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग तभी सार्थक होगा जब उसके साथ सकारात्मक आचरण, संवाद और सहयोग की भावना हो। स्वस्थ चर्चा और सार्थक बहस लोकतंत्र की आत्मा हैं, और इन्हें बढ़ावा देने के लिए सभी पीठासीन अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अपने संबोधन के अंत में लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत की विधायिकाएं विश्व के लिए एक उदाहरण बन सकती हैं, यदि वे परंपरा और आधुनिकता के संतुलन के साथ आगे बढ़ें। तकनीक, क्षमता-वृद्धि और नैतिक मूल्यों के समन्वय से विधायिका न केवल मजबूत होगी, बल्कि लोकतंत्र को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।



