Digital Arrest Scam Alert: डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड क्या है और इससे कैसे बचें?

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी के मामले देशभर में तेजी से बढ़ रहे हैं। जालसाज खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और करोड़ों रुपये की ठगी कर लेते हैं। इस नए तरह के फ्रॉड में अपराधी फोन कॉल, वीडियो कॉल या मैसेज के जरिए पीड़ित को यह विश्वास दिलाते हैं कि वह किसी गंभीर अपराध में फंस चुका है और उसे “डिजिटल अरेस्ट” किया जा रहा है। दरअसल, भारत के कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती, लेकिन डर और भ्रम के कारण लोग जालसाजों की बातों में आ जाते हैं।
इस ठगी का तरीका बेहद शातिर होता है। साइबर अपराधी पहले पीड़ित को कॉल कर बताते हैं कि उसके आधार, बैंक अकाउंट या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किसी गैरकानूनी गतिविधि में हुआ है। इसके बाद वे धमकी देते हैं कि अगर तुरंत सहयोग नहीं किया गया तो गिरफ्तारी हो जाएगी। कई मामलों में जालसाज वीडियो कॉल पर फर्जी पुलिस यूनिफॉर्म पहनकर भरोसा जीतते हैं। फिर “जांच” के नाम पर बैंक बैलेंस की जानकारी मांगते हैं या खाते में मौजूद पैसे किसी “सुरक्षित सरकारी अकाउंट” में ट्रांसफर करने को कहते हैं, जो असल में जालसाज का ही अकाउंट होता है।
साइबर ठगों से बचने के लिए सबसे जरूरी है जागरूकता। सबसे पहले यह समझ लें कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही पैसे ट्रांसफर करने को कहती है। अगर किसी अनजान नंबर से इस तरह की कॉल आए तो घबराएं नहीं और बातचीत तुरंत बंद कर दें। कभी भी अपने बैंक डिटेल्स, ओटीपी, पिन या व्यक्तिगत जानकारी किसी को न दें। किसी भी संदिग्ध कॉल की पुष्टि के लिए नजदीकी पुलिस स्टेशन या संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी लें।
इसके अलावा, अपने मोबाइल और ईमेल की सुरक्षा मजबूत रखें। अनजान लिंक पर क्लिक न करें और सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी साझा करने से बचें। अगर आपको लगता है कि आप साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। समय पर शिकायत करने से पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
डिजिटल युग में सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है। थोड़ी सी सावधानी और सही जानकारी आपको डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर फ्रॉड से सुरक्षित रख सकती है।



