रियल एस्टेट सेक्टर में सुस्ती: 8 शहरों में घरों की बिक्री घटी, शेयरों पर दबाव

देश का रियल एस्टेट सेक्टर इन दिनों सुस्ती के दौर से गुजर रहा है। बीते कुछ महीनों में देश के 8 प्रमुख शहरों में घरों की बिक्री में साफ गिरावट दर्ज की गई है, जिससे बाजार की रफ्तार थमती नजर आ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ती ब्याज दरें, महंगाई का दबाव और उपभोक्ताओं की कमजोर क्रय शक्ति इस मंदी के प्रमुख कारण हैं। खासतौर पर मिडिल क्लास और पहली बार घर खरीदने वाले खरीदार फिलहाल बड़े निवेश से बचते दिख रहे हैं, जिसका सीधा असर बिक्री के आंकड़ों पर पड़ा है।
मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में नए बुकिंग्स में कमी देखी गई है। जहां पिछले साल तक त्योहारी सीजन में घरों की मांग बढ़ जाती थी, वहीं इस बार वह उत्साह नजर नहीं आया। कई डेवलपर्स ने नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने की रफ्तार भी धीमी कर दी है और फोकस पुराने स्टॉक को निकालने पर है। कुछ कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए छूट, आसान भुगतान योजना और अतिरिक्त सुविधाओं का सहारा ले रही हैं।
इस सुस्ती का असर शेयर बाजार पर भी साफ दिख रहा है। रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में पिछले तीन महीनों से लगातार गिरावट देखी जा रही है। निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है क्योंकि बिक्री घटने से कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ने की आशंका है। कई रियल्टी शेयर अपने हालिया उच्च स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं, जिससे सेक्टर का सेंटीमेंट नकारात्मक बना हुआ है।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह स्थिति स्थायी नहीं है। सरकार की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता खर्च, शहरीकरण की रफ्तार और किफायती आवास योजनाएं आने वाले समय में बाजार को सहारा दे सकती हैं। अगर ब्याज दरों में स्थिरता आती है और आर्थिक माहौल बेहतर होता है, तो मांग में दोबारा सुधार देखने को मिल सकता है। फिलहाल रियल एस्टेट सेक्टर एक चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है, जहां खरीदार, डेवलपर और निवेशक—तीनों ही सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।



