
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एक बार फिर अपने बयान को लेकर सियासी घमासान में फंस गए हैं। वर्ष 2020 में जिस अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा प्लान को उन्होंने “अन्यायपूर्ण” और “फिलिस्तीनियों के अधिकारों के खिलाफ” बताया था, उसी योजना को 2026 में “ओके” कहने पर अब उनकी जमकर आलोचना हो रही है। शहबाज शरीफ के इस बदले रुख ने न सिर्फ विपक्ष को हमला करने का मौका दिया है, बल्कि पाकिस्तान के भीतर भी उनकी विदेश नीति पर सवाल उठने लगे हैं।
दरअसल, 2020 में ट्रंप प्रशासन द्वारा पेश किए गए मिडिल ईस्ट पीस प्लान को लेकर शहबाज शरीफ ने साफ कहा था कि यह योजना फिलिस्तीनी जनता के साथ अन्याय है और इससे क्षेत्र में स्थायी शांति नहीं आ सकती। उस समय उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी पाकिस्तान के पारंपरिक रुख को दोहराया था कि गाजा और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों को उनका अधिकार मिलना चाहिए। लेकिन अब 2026 में उसी योजना के कुछ पहलुओं को “स्वीकार्य” बताना कई लोगों को हैरान कर रहा है।
आलोचकों का कहना है कि शहबाज शरीफ का यह यू-टर्न अमेरिका के साथ रिश्ते सुधारने और आर्थिक मदद हासिल करने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है और अंतरराष्ट्रीय समर्थन उसके लिए बेहद अहम है। ऐसे में विदेश नीति में लचीलापन दिखाना सरकार की मजबूरी भी मानी जा रही है। हालांकि विपक्षी दलों का आरोप है कि यह लचीलापन नहीं, बल्कि सिद्धांतों से समझौता है।
पाकिस्तान में धार्मिक और राजनीतिक संगठनों ने भी इस बयान पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि फिलिस्तीन का मुद्दा सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि उस्मानी और इस्लामी एकजुटता से जुड़ा हुआ है। ऐसे में पहले “अन्यायपूर्ण” कहकर बाद में “ओके” कहना जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।



