
77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य परेड ने भारत की सैन्य ताकत, तकनीकी आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक गौरव का शानदार प्रदर्शन किया। इस वर्ष की परेड का केंद्रीय संदेश था—आत्मनिर्भर भारत, सशक्त भारत। आधुनिक हथियार प्रणालियों, स्वदेशी रक्षा तकनीक और अनुशासित सैन्य टुकड़ियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत आज न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा में सक्षम है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी पूरी तरह तैयार है।
परेड में पहली बार या उन्नत स्वरूप में प्रदर्शित किए गए शक्तिबाण, दिव्यास्त्र और सूर्यास्त्र जैसे स्वदेशी प्रणालियों ने दर्शकों का ध्यान खींचा। ये प्रणालियां भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की वर्षों की मेहनत का परिणाम हैं, जो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर रक्षा’ की नीति को मजबूत आधार प्रदान करती हैं। इन आधुनिक हथियारों की क्षमताएं—तेज प्रतिक्रिया, सटीकता और बहुआयामी उपयोग—भारत की रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाइयों पर ले जाती हैं।
थलसेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त झांकी ने त्रि-सेवा समन्वय की ताकत को बखूबी दर्शाया। आधुनिक टैंक, मिसाइल प्रणालियां, रडार और ड्रोन क्षमताओं के प्रदर्शन ने यह संदेश दिया कि भारत भविष्य के युद्धक्षेत्र की आवश्यकताओं को समझते हुए लगातार नवाचार कर रहा है। वायुसेना के हवाई करतबों ने आसमान में साहस और कौशल का अद्भुत दृश्य रचा, जिसने युवाओं में राष्ट्रसेवा के प्रति उत्साह जगाया।
सैन्य शक्ति के साथ-साथ परेड में भारत की सांस्कृतिक विविधता भी पूरे वैभव के साथ नजर आई। विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियों ने लोककला, परंपराओं और विकास की उपलब्धियों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। नारी शक्ति, युवा प्रतिभा और तकनीकी प्रगति—इन सभी विषयों को झांकियों में प्रभावशाली ढंग से उकेरा गया।
कुल मिलाकर, 77वें गणतंत्र दिवस की परेड ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत शांति का पक्षधर रहते हुए भी अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा। शक्तिबाण से सूर्यास्त्र तक का प्रदर्शन केवल हथियारों की झलक नहीं था, बल्कि यह उस आत्मविश्वास का प्रतीक था, जो भारत को वैश्विक मंच पर एक सशक्त और जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में स्थापित करता है।



