
अमेरिका और पाकिस्तान के बीच हाल के महीनों में कूटनीतिक स्तर पर नजदीकियां बढ़ती दिखाई दे रही थीं, लेकिन इसी बीच अमेरिका ने पाकिस्तान को एक करारा तमाचा देते हुए अपने नागरिकों को वहां यात्रा न करने की सख्त सलाह जारी कर दी है। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी इस ट्रैवल एडवाइजरी में पाकिस्तान को उच्च जोखिम वाला देश बताया गया है। इसमें आतंकवाद, आंतरिक अस्थिरता, सांप्रदायिक हिंसा और सुरक्षा एजेंसियों की सीमित पहुंच जैसे कारणों का उल्लेख किया गया है। इस चेतावनी के बाद एक बार फिर पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था और आंतरिक हालात पर अंतरराष्ट्रीय सवाल खड़े हो गए हैं।
अमेरिकी सरकार ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान के कई इलाकों में आतंकी संगठनों की सक्रियता अब भी बनी हुई है। खासकर खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा से सटे क्षेत्रों को बेहद संवेदनशील माना गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विदेशी नागरिक अक्सर आतंकी हमलों, अपहरण और लक्षित हिंसा का शिकार बन सकते हैं। इसी वजह से अमेरिकी नागरिकों को अनावश्यक यात्रा से बचने और अत्यंत आवश्यक स्थिति में ही सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत यात्रा करने की सलाह दी गई है।
यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब पाकिस्तान अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। रक्षा सहयोग, आर्थिक मदद और कूटनीतिक संवाद को लेकर दोनों देशों के बीच सकारात्मक संकेत मिल रहे थे। लेकिन ट्रैवल एडवाइजरी ने पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को बड़ा झटका दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पाकिस्तान में निवेश, पर्यटन और विदेशी व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
भारत के संदर्भ में भी यह चेतावनी अहम मानी जा रही है। भारत लंबे समय से पाकिस्तान में आतंकवाद और अस्थिरता का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। अमेरिकी कदम से भारत के रुख को अप्रत्यक्ष समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। कुल मिलाकर, अमेरिका की इस सख्त चेतावनी ने यह साफ कर दिया है कि कूटनीतिक नजदीकियों के बावजूद पाकिस्तान की जमीनी सुरक्षा स्थिति पर अभी भी गंभीर संदेह बना हुआ है, और यही वजह है कि अमेरिका ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए यह कठोर फैसला लिया है।



