
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे देश के लिए “ऐतिहासिक और दूरदर्शी” करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के निर्यात को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा, घरेलू उद्योगों को वैश्विक बाजारों से जोड़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि एफटीए का उद्देश्य केवल टैरिफ में कटौती नहीं, बल्कि तकनीक, निवेश, सप्लाई चेन और टिकाऊ विकास जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है। कांग्रेस द्वारा उठाई गई आपत्तियों और टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए मंत्री ने कहा कि विपक्ष की आलोचनाएं तथ्यपरक नहीं हैं और यह “अंगूर खट्टे हैं” वाली मानसिकता को दर्शाती हैं। उनका कहना था कि जब देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है और भारत वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है, तब कुछ लोगों को यह प्रगति रास नहीं आ रही। गोयल ने यह भी रेखांकित किया कि एफटीए की बातचीत में किसानों, एमएसएमई और संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की पूरी तरह रक्षा की गई है। सरकार ने किसी भी ऐसे प्रावधान को स्वीकार नहीं किया है जिससे घरेलू उद्योगों को नुकसान पहुंचे। इसके उलट, यह समझौता भारतीय उत्पादों—जैसे टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, आईटी सेवाएं और कृषि आधारित वस्तुओं—को यूरोप के बड़े बाजार तक बेहतर पहुंच देगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत व्यापार समझौतों को केवल आंकड़ों के खेल के रूप में नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों के नजरिए से देखता है। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए गोयल ने याद दिलाया कि पिछली सरकारों के दौर में कई ऐसे समझौते किए गए जिनसे भारत को अपेक्षित लाभ नहीं मिला, जबकि मौजूदा सरकार हर समझौते में ‘भारत पहले’ की नीति अपनाती है। कुल मिलाकर, भारत-ईयू एफटीए को लेकर सरकार का दावा है कि यह समझौता भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाएगा, निवेश आकर्षित करेगा और 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था में भारत को एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगा।



