टायर में छोटी सी दरार भी बन सकती है बड़े हादसे की वजह, सड़क पर निकलने से पहले जानें असली कारण

अक्सर लोग गाड़ी की सर्विस, इंजन ऑयल और माइलेज पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन टायर की सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि सच यह है कि सड़क पर आपकी सुरक्षा का सबसे बड़ा जिम्मा टायर के कंधों पर ही होता है। टायर में दिखने वाली छोटी-सी दरार भी किसी बड़े खतरे की घंटी हो सकती है। कई बार ये दरारें इतनी मामूली लगती हैं कि ड्राइवर उन्हें अनदेखा कर देता है, लेकिन तेज रफ्तार, भारी लोड या लंबी दूरी में यही छोटी समस्या ब्लोआउट जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।
टायर में दरार पड़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सबसे आम वजह है रबर का पुराना होना। समय के साथ टायर का कंपाउंड सख्त होने लगता है, उसकी लचक कम हो जाती है और सतह पर बारीक क्रैक दिखाई देने लगते हैं। इसे ड्राई रॉट भी कहा जाता है। अगर आपकी गाड़ी कम चलती है और लंबे समय तक धूप या खुले मौसम में खड़ी रहती है, तब भी टायर जल्दी खराब हो सकते हैं। सूरज की यूवी किरणें और गर्मी रबर को कमजोर करती हैं।
दूसरा बड़ा कारण है गलत एयर प्रेशर। कम हवा में टायर ज्यादा दबता है, जिससे साइडवॉल पर अतिरिक्त तनाव आता है और दरारें बन सकती हैं। वहीं जरूरत से ज्यादा हवा भी टायर को सख्त बना देती है, जिससे झटकों का असर सीधे रबर पर पड़ता है। खराब सड़कें, गड्ढे, स्पीड ब्रेकर पर तेज चढ़ना या ओवरलोडिंग भी टायर की उम्र घटा देते हैं।
कई बार लोग ट्रेड देखकर समझते हैं कि टायर अभी ठीक है, लेकिन साइड में पड़ी दरारें ज्यादा खतरनाक होती हैं। ये अचानक फटने का कारण बन सकती हैं। अगर दरारें गहरी दिखें, उंगलियों से महसूस हों या रबर पर जाल जैसा पैटर्न बन जाए, तो तुरंत टायर चेक कराना चाहिए। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि 5-6 साल से पुराने टायर, भले कम चले हों, फिर भी बदल देना बेहतर है।
सुरक्षित सफर के लिए जरूरी है कि महीने में कम से कम एक बार टायर का निरीक्षण करें। एयर प्रेशर सही रखें, गाड़ी को लंबे समय तक एक ही जगह खड़ा न रहने दें और समय-समय पर व्हील अलाइनमेंट व बैलेंसिंग कराते रहें। याद रखिए, टायर पर खर्च किया गया पैसा आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा में निवेश है। छोटी दरार को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी परेशानी बुलाने जैसा हो सकता है। अगर समय रहते सावधानी बरती जाए, तो सड़क पर होने वाले कई हादसों से बचा जा सकता है।



