मिशन हरा चारा: यूपी की गोशालाओं में शुरू होगा स्वावलंबी चारा उत्पादन

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की गोशालाओं में ‘मिशन हरा चारा’ अभियान की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य गोवंश के लिए पर्याप्त और पौष्टिक चारा सुनिश्चित करना है। इस योजना के तहत गोशालाओं में मोरिंगा और नेपियर घास की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। मोरिंगा, जिसे ‘सुपरफूड’ भी कहा जाता है, विटामिन, मिनरल और प्रोटीन से भरपूर है और गोवंश के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। नेपियर घास की खेती तेज़ी से होती है और यह हर मौसम में उपलब्ध रहती है, जिससे गोशालाओं में चारे की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।
‘मिशन हरा चारा’ का मुख्य उद्देश्य गोशालाओं को चारे के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है। इसके साथ ही, यह योजना उन शेल्टर होम्स और पशु संरक्षण केंद्रों के लिए भी लाभकारी साबित होगी, जहां गोवंश की संख्या अधिक है और पारंपरिक चारे की आपूर्ति में कमी रहती है। इस पहल से न केवल गोवंश का स्वास्थ्य बेहतर होगा, बल्कि उनकी उत्पादकता—जैसे दूध उत्पादन—में भी वृद्धि होगी।
यूपी सरकार ने इसके लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिसमें गोशाला कर्मचारियों और स्थानीय किसानों को मोरिंगा और नेपियर घास की उन्नत खेती के तरीके, कटाई, संग्रहण और संरक्षण के तरीकों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही, इन फसलों के जैविक उर्वरक और पानी की कम खपत वाले मॉडर्न तकनीकों का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह कदम पर्यावरण के अनुकूल भी है, क्योंकि इन पौधों से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और रासायनिक खाद की जरूरत कम होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिशन हरा चारा को पूरी तरह लागू किया जाता है, तो उत्तर प्रदेश की गोशालाओं में गोवंश के लिए पोषण की कमी की समस्या लगभग समाप्त हो जाएगी। इसके अलावा, स्थानीय किसानों को भी इस योजना से रोजगार और आय का अवसर मिलेगा, क्योंकि वे इन पौधों की खेती और गोशालाओं को सप्लाई कर सकेंगे।
इस योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार ने यह संदेश दिया है कि पशुपालन और गो संरक्षण में स्थायी और स्वावलंबी मॉडल को बढ़ावा देना राज्य की प्राथमिकता है। मिशन हरा चारा न केवल गोवंश के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह पशुपालकों, गोशालाओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।



