हनुमान जी की पूजा में महिलाओं के नियम: क्या सच में पैर छूना मना है?

हनुमान जी की भक्ति भारत में अत्यंत लोकप्रिय है। उन्हें संकटमोचन, भक्तों के रक्षक और शक्ति-भक्ति के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। लेकिन अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या महिलाओं के लिए हनुमान जी की पूजा को लेकर अलग नियम बनाए गए हैं? खासतौर पर यह बात बार-बार सुनने को मिलती है कि महिलाओं को हनुमान जी के चरण स्पर्श नहीं करने चाहिए। इस मान्यता के पीछे धार्मिक, सांस्कृतिक और लोकपरंपराओं का मिश्रण देखने को मिलता है।
कई विद्वान मानते हैं कि हनुमान जी को बाल ब्रह्मचारी माना गया है। इसी कारण कुछ परंपराओं में महिलाओं द्वारा चरण स्पर्श को मर्यादा के विरुद्ध बताया जाता है। हालांकि यह नियम हर मंदिर या हर संप्रदाय में समान रूप से लागू नहीं है। बहुत से स्थानों पर महिलाएं बिना किसी रोक-टोक के पूजा, आरती, चोला चढ़ाना या प्रसाद अर्पित करती हैं। कुछ मंदिरों में केवल मूर्ति को छूने की बजाय दूर से प्रणाम करने की सलाह दी जाती है, जो पुरुषों पर भी लागू हो सकती है।
धर्मशास्त्रों में इस विषय पर स्पष्ट और सार्वभौमिक प्रतिबंध का उल्लेख नहीं मिलता। अधिकतर बातें लोकमान्यताओं और परंपरागत मान्यताओं से जुड़ी हैं, जो समय और स्थान के अनुसार बदलती रही हैं। कई आचार्य यह भी कहते हैं कि भक्ति में सबसे महत्वपूर्ण भाव होता है। अगर श्रद्धा सच्ची है तो भगवान तक पहुंचने के लिए किसी विशेष शारीरिक क्रिया की अनिवार्यता नहीं होती। हाथ जोड़कर नमस्कार करना भी उतना ही मान्य है जितना चरण स्पर्श।
आज के समय में कई महिलाएं हनुमान चालीसा का पाठ करती हैं, व्रत रखती हैं और मंदिरों में नियमित रूप से दर्शन करती हैं। उनके लिए भक्ति आस्था का विषय है, न कि प्रतिबंध का। इसलिए यह कहना सही होगा कि चरण छूने की मनाही कोई कठोर धार्मिक नियम से ज्यादा एक पारंपरिक मान्यता है। अंततः श्रद्धालु को अपने मंदिर की परंपरा और अपनी आस्था के अनुसार ही आचरण करना चाहिए।



