
भारत की सैन्य क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में रक्षा मंत्रालय ने बड़ा फैसला लेते हुए 114 राफेल फाइटर जेट और 6 पी-8आई समुद्री गश्ती विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय को भारतीय वायुसेना और नौसेना की जरूरतों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। लंबे समय से लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ाने और समुद्री निगरानी तंत्र को आधुनिक बनाने की मांग उठती रही है, जिसे अब इस डील के जरिए गति मिलने की उम्मीद है।
राफेल लड़ाकू विमान अपनी अत्याधुनिक तकनीक, मारक क्षमता और मल्टी-रोल ऑपरेशन के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। ये हवा से हवा और हवा से जमीन पर सटीक प्रहार करने में सक्षम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन विमानों के शामिल होने से भारतीय वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा होगा और सीमाओं पर रणनीतिक बढ़त मिलेगी। दूसरी ओर, P-8I विमान लंबी दूरी की समुद्री निगरानी, पनडुब्बी रोधी अभियानों और खुफिया जानकारी जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए इनकी संख्या बढ़ाना जरूरी माना जा रहा था।
सरकार का कहना है कि यह कदम सशस्त्र बलों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की रणनीति का हिस्सा है। इसके साथ ही रक्षा खरीद में ‘मेक इन इंडिया’ और तकनीकी साझेदारी को भी प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिल सके। माना जा रहा है कि इस सौदे से भारतीय उद्योगों को भी बड़े अवसर मिलेंगे और रोजगार सृजन को गति मिलेगी।
सुरक्षा विशेषज्ञ इसे क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बता रहे हैं। पड़ोसी देशों की सैन्य आधुनिकीकरण की रफ्तार को देखते हुए भारत का यह कदम सामरिक दृष्टि से मजबूती प्रदान करेगा। आने वाले वर्षों में जब ये विमान बेड़े में शामिल होंगे, तब वायु और समुद्री सुरक्षा ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर, यह फैसला भारत की रक्षा तैयारी को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।



