
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कहा है कि भारत आज “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पर सवार होकर तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में वैश्विक आर्थिक विकास का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है। उनके मुताबिक बीते दशक में देश ने नीतिगत स्थिरता, बुनियादी ढांचे के विस्तार, डिजिटल क्रांति और निवेशक-अनुकूल माहौल के जरिए ऐसी मजबूत नींव तैयार की है, जिस पर लंबी अवधि की ऊंची विकास दर कायम रह सकती है। सरकार का जोर केवल सुधारों की घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने और आम नागरिक तक लाभ पहुंचाने पर है। यही वजह है कि भारत को दुनिया की सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिना जा रहा है।
पीएम मोदी ने रेखांकित किया कि टैक्स सुधार, श्रम कानूनों में बदलाव, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, स्टार्टअप और नवाचार के लिए अनुकूल वातावरण—इन सभी ने मिलकर भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को नई ऊंचाई दी है। डिजिटल भुगतान, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और पारदर्शी नीतियों ने भ्रष्टाचार कम किया है और सरकारी योजनाओं की डिलीवरी बेहतर की है। इससे देश में विश्वास का माहौल बना है, जो घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की युवा आबादी, तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग और टेक्नोलॉजी को अपनाने की क्षमता देश को वैश्विक सप्लाई चेन का अहम केंद्र बना रही है। मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस, रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम हो रहा है। भारत अब केवल बाजार नहीं, बल्कि समाधान देने वाला देश बनना चाहता है। दुनिया जब भरोसेमंद साझेदार की तलाश करती है, तो भारत स्वाभाविक विकल्प के रूप में सामने आता है।
प्रधानमंत्री के अनुसार “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” की नीति ने शासन की सोच बदल दी है। इंफ्रास्ट्रक्चर में रिकॉर्ड निवेश, हाईवे, रेल, बंदरगाह और एयरपोर्ट का विस्तार, साथ ही ग्रामीण कनेक्टिविटी पर जोर—ये सब आर्थिक गतिविधियों को नई गति दे रहे हैं। छोटे उद्यमों, किसानों और महिलाओं को सशक्त करने की योजनाएं विकास को समावेशी बना रही हैं।
अंत में पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि भारत की विकास यात्रा सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह करोड़ों लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाएगी। उनका कहना है कि दुनिया की अनिश्चितताओं के बीच भारत स्थिरता, लोकतंत्र और विकास का ऐसा मॉडल पेश कर रहा है, जो आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।



