
17 फरवरी को भारत और फ्रांस के रिश्तों में एक अहम पड़ाव जुड़ने जा रहा है, जब फ्रांसीसी राष्ट्रपति Emmanuel Macron भारत की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे प्रतिष्ठित इंडिया-AI इम्पैक्ट समिट में भी हिस्सा लेंगे, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य, उसके सुरक्षित उपयोग, और वैश्विक सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा होने की संभावना है। यह दौरा केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि टेक्नोलॉजी, रक्षा, जलवायु परिवर्तन, शिक्षा और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे कई रणनीतिक क्षेत्रों में नई दिशा तय कर सकता है।
भारत और फ्रांस के बीच लंबे समय से भरोसेमंद साझेदारी रही है। रक्षा सौदों से लेकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग तक, दोनों देशों ने एक-दूसरे का लगातार साथ दिया है। अब जब दुनिया तेजी से AI आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही है, तो यह स्वाभाविक है कि नई तकनीक पर साझा दृष्टिकोण विकसित किया जाए। समिट में डेटा सुरक्षा, एथिकल AI, स्किल डेवलपमेंट और रिसर्च पार्टनरशिप जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेता स्टार्टअप और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त फंड, छात्र-विनिमय कार्यक्रम और उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग को भी विस्तार देने पर विचार कर सकते हैं। फ्रांस की कंपनियां भारत में निवेश बढ़ाने को इच्छुक हैं, वहीं भारतीय टेक टैलेंट यूरोप के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ऐसे में यह मुलाकात आर्थिक रिश्तों को नई गति दे सकती है।
जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा भी वार्ता के प्रमुख विषयों में शामिल रहेंगे। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत और फ्रांस अक्सर समान सोच रखते हैं, और ग्रीन टेक्नोलॉजी में साझेदारी दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। इसके अलावा, वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और बहुपक्षीय सहयोग पर भी बातचीत होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, 17 फरवरी की यह बैठक केवल एक राजनयिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य की टेक्नोलॉजी और वैश्विक व्यवस्था में भारत-फ्रांस की संयुक्त भूमिका को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। दुनिया की निगाहें इस पर टिकी रहेंगी कि इस समिट से कौन-कौन से ठोस निर्णय निकलकर सामने आते हैं।



