
ईरान की सियासत एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में है। देश के पूर्व शाही परिवार से जुड़े निर्वासित नेता Reza Pahlavi ने हाल ही में United States के राष्ट्रपति से खुलकर समर्थन मांगा है। उनका कहना है कि अब समय आ गया है जब ईरान में मौजूदा व्यवस्था, यानी Islamic Republic of Iran, को समाप्त कर लोकतांत्रिक ढांचे की ओर बढ़ा जाए। पहलवी लंबे समय से ईरानी प्रवासियों और विपक्षी समूहों के बीच सक्रिय रहे हैं और वे खुद को एक ऐसे विकल्प के रूप में पेश करते हैं जो देश को धर्मतंत्र से निकालकर आधुनिक, सेक्युलर और जनतांत्रिक दिशा दे सकता है।
रजा पहलवी ने अपने बयान में कहा कि ईरान की जनता वर्षों से आर्थिक दबाव, सामाजिक पाबंदियों और राजनीतिक नियंत्रण का सामना कर रही है। उनका दावा है कि हाल के प्रदर्शनों ने यह साफ कर दिया है कि बड़ी संख्या में लोग परिवर्तन चाहते हैं। उन्होंने अमेरिका सहित पश्चिमी देशों से अपील की कि वे सिर्फ बयानबाजी तक सीमित न रहें, बल्कि लोकतांत्रिक ताकतों को व्यावहारिक और कूटनीतिक समर्थन दें। उनके मुताबिक अंतरराष्ट्रीय समुदाय का नैतिक दायित्व है कि वह मानवाधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्ष चुनाव की मांग कर रहे लोगों के साथ खड़ा हो।
हालांकि इस अपील ने नई बहस भी छेड़ दी है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि बाहरी समर्थन की खुली मांग से ईरान के भीतर विपक्ष की वैधता पर सवाल उठ सकते हैं, क्योंकि सत्ता प्रतिष्ठान इसे विदेशी दखल के रूप में पेश कर सकता है। वहीं समर्थकों का तर्क है कि जब अंदरूनी राजनीतिक स्पेस सीमित हो, तो वैश्विक दबाव ही बदलाव का रास्ता बनता है। रजा पहलवी ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी हिंसक उथल-पुथल को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण संक्रमण के लिए अंतरराष्ट्रीय एकजुटता तैयार करना है।
आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि अमेरिकी प्रशासन इस पर कैसी प्रतिक्रिया देता है और क्या वैश्विक मंचों पर ईरान को लेकर कोई नई रणनीति उभरती है। फिलहाल इतना तय है कि रजा पहलवी की यह अपील मध्य-पूर्व की राजनीति में एक नया विमर्श जोड़ रही है, जिसमें शासन परिवर्तन, जनता की आकांक्षाएं और अंतरराष्ट्रीय भूमिका जैसे सवाल फिर से केंद्र में आ गए हैं।



