यूपी विधान परिषद में निजीकरण पर हंगामा, सपा का वॉकआउट; श्रम मंत्री ने आरोपों को किया खारिज

उत्तर प्रदेश की विधान परिषद में निजीकरण के मुद्दे को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने प्रदेश में विभिन्न विभागों और सेवाओं के निजीकरण को लेकर सरकार पर तीखे आरोप लगाए। विपक्ष का कहना था कि निजीकरण की नीतियों से सरकारी नौकरियां कम हो रही हैं और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस दौरान सपा सदस्यों ने नारेबाजी की और सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग की। स्थिति जब ज्यादा तनावपूर्ण हो गई तो सपा के सदस्यों ने विरोध स्वरूप सदन से बहिर्गमन कर दिया।
सरकार की ओर से श्रम मंत्री ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए कहा कि प्रदेश सरकार रोजगार सृजन और श्रमिकों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निजीकरण का उद्देश्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाना और निवेश को आकर्षित करना है, न कि रोजगार खत्म करना। मंत्री ने कहा कि सरकार पारदर्शिता के साथ निर्णय ले रही है और किसी भी कर्मचारी के हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी। उन्होंने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप भी लगाया।
श्रम मंत्री ने आगे कहा कि प्रदेश में औद्योगिक विकास और आधारभूत संरचना के विस्तार के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी जरूरी है। इससे नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले वर्षों में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाखों युवाओं को रोजगार मिला है। सरकार ने आश्वासन दिया कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त कानून लागू हैं और किसी भी तरह के शोषण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार महत्वपूर्ण सार्वजनिक संस्थानों को निजी हाथों में सौंपकर सामाजिक सुरक्षा को कमजोर कर रही है। वहीं सरकार का कहना है कि यह सुधारात्मक कदम हैं जो प्रदेश को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए आवश्यक हैं। हंगामे के बीच सभापति को कई बार व्यवस्था बहाल करने की अपील करनी पड़ी। अंततः विपक्ष के बहिर्गमन के बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी। निजीकरण का यह मुद्दा आने वाले समय में भी राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है।



