
कनाडा में विदेशी छात्रों की संख्या में 61% की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो पिछले कुछ वर्षों में सबसे बड़ी कमी मानी जा रही है। इस बदलाव के पीछे कनाडा सरकार द्वारा लागू किए गए नए और सख्त स्टडी वीजा नियमों को प्रमुख कारण माना जा रहा है। आव्रजन विभाग की नीतियों में किए गए बदलावों के तहत स्टडी परमिट की संख्या पर सीमा तय की गई, कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया कड़ी की गई और वित्तीय प्रमाणों को लेकर शर्तें सख्त कर दी गईं। इन फैसलों का सीधा असर भारतीय छात्रों पर पड़ा है, क्योंकि भारत लंबे समय से कनाडा के लिए सबसे बड़े छात्र स्रोत देशों में शामिल रहा है। कई भारतीय छात्र, जो बेहतर शिक्षा और स्थायी निवास की संभावनाओं के चलते कनाडा का रुख करते थे, अब वैकल्पिक देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और जर्मनी की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा में बढ़ती आवास समस्या, जीवन-यापन की लागत और फर्जी कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई भी इस गिरावट की बड़ी वजह रही है। भारतीय छात्रों और उनके अभिभावकों में अनिश्चितता का माहौल बना है, क्योंकि नए नियमों के चलते वीजा स्वीकृति दर में कमी आई है और प्रोसेसिंग समय भी बढ़ा है। हालांकि कनाडा सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता बनाए रखना और स्थानीय संसाधनों पर दबाव कम करना है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या कनाडा अपनी नीतियों में संतुलन बनाते हुए फिर से अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित कर पाता है या भारतीय छात्र अन्य देशों को प्राथमिकता देते रहेंगे।



