हवा में प्रदूषण से बढ़ रहा अल्जाइमर का खतरा, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी

हाल ही में हुई एक वैश्विक रिसर्च में खुलासा हुआ है कि जहरीली और प्रदूषित हवा Alzheimer यानी स्मृति संबंधी गंभीर बीमारियों के खतरे को तेजी से बढ़ा रही है। अध्ययन में पौने तीन करोड़ लोगों को शामिल किया गया और लंबे समय तक उनके स्वास्थ्य पर प्रदूषण के प्रभाव का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं का कहना है कि हवा में मौजूद सूक्ष्म कण और रासायनिक प्रदूषक सीधे मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे याददाश्त कमजोर होती है और अल्जाइमर जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक प्रदूषणयुक्त वातावरण में रहने वाले लोग मानसिक और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया कि शहरों में रहने वाले बुजुर्ग और मध्यम आयु वर्ग के लोग विशेष रूप से इस खतरे के अधीन हैं, क्योंकि शहरी क्षेत्रों में धुएं, औद्योगिक उत्सर्जन और वाहनों से निकलने वाले हानिकारक कण अधिक होते हैं। इसके अलावा, शोध ने संकेत दिया कि जिन लोगों को पहले से हृदय या फेफड़ों की बीमारियां हैं, उनमें अल्जाइमर का खतरा और भी अधिक बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को गंभीरता से लागू करना अब अत्यंत आवश्यक है। यह सिर्फ पर्यावरण की सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि लोगों के मस्तिष्क और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए भी जरूरी है। मास्क का उपयोग, हरित क्षेत्र बढ़ाना, औद्योगिक उत्सर्जन पर नियंत्रण और सार्वजनिक परिवहन के विकल्प अपनाना कुछ ऐसे कदम हैं जो प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकते हैं।



