इम्युनिटी सिर्फ उम्र से नहीं, जन्मस्थान और जेंडर भी असर डालते हैं – वैज्ञानिक अध्ययन

हम अक्सर सोचते हैं कि हमारी इम्युनिटी यानी प्रतिरक्षा प्रणाली केवल हमारी उम्र और जीवनशैली पर निर्भर करती है। लेकिन हाल ही में हुई एक रिसर्च ने यह साबित किया है कि सिर्फ उम्र ही नहीं, बल्कि बर्थप्लेस और जेंडर भी हमारी इम्युनिटी को प्रभावित करते हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि जिस वातावरण में कोई व्यक्ति जन्म लेता है, वह उसके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर स्थायी प्रभाव डाल सकता है। उदाहरण के लिए, जिन लोगों का जन्म प्रदूषण, संक्रमण या पोषण की कमी वाले क्षेत्रों में हुआ, उनकी इम्युनिटी पर लंबे समय तक असर पड़ता है।
इसके अलावा, शोध में यह भी सामने आया कि पुरुष और महिलाओं की इम्युनिटी में प्राकृतिक अंतर होता है। महिलाओं में हार्मोनल प्रभाव और जैविक संरचना के कारण कई संक्रमणों से लड़ने की क्षमता अधिक होती है, जबकि पुरुषों में कुछ स्थितियों में इम्युनिटी कमजोर रह सकती है। वहीं, उम्र के साथ इम्युनिटी का स्तर भी बदलता है। छोटे बच्चों की इम्युनिटी कमजोर होती है और वृद्ध लोगों में यह धीरे-धीरे घटती है। लेकिन अब वैज्ञानिक यह कह रहे हैं कि जन्मस्थान और जेंडर के प्रभाव के कारण ये उम्र आधारित आंकड़े भी अलग-अलग हो सकते हैं।
अध्ययन के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का जन्म किसी ट्रॉपिकल क्षेत्र या संक्रमण वाले इलाके में हुआ है, तो उसके शरीर में रोगों के खिलाफ प्राकृतिक एंटीबॉडी विकसित होने की संभावना अधिक होती है। वहीं, ठंडी या प्रदूषित जगहों पर जन्मे लोग अक्सर अलग प्रकार की इम्युनिटी के साथ पैदा होते हैं। यह रिसर्च हेल्थकेयर और पर्सनल मेडिसिन के क्षेत्र में नई दिशा दे सकती है, क्योंकि इससे यह समझने में मदद मिलती है कि हर व्यक्ति की इम्युनिटी अलग होती है और उसी के अनुसार स्वास्थ्य नीतियां बनाई जा सकती हैं।
इसलिए सिर्फ उम्र पर भरोसा करने के बजाय, हमें अपनी जन्मभूमि, लिंग और व्यक्तिगत जैविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपनी इम्युनिटी को मजबूत करने के उपाय अपनाने चाहिए। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना हर किसी के लिए जरूरी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में इम्युनिटी बढ़ाने के लिए पर्सनलाइज्ड हेल्थ प्लान और भी प्रभावी साबित हो सकते हैं।



