सुपर-8 में ICC के प्री-सीडिंग नियम से असहमत सूर्यकुमार यादव, बोले- ‘मैदान पर हो बराबरी की टक्कर’

आईसीसी टूर्नामेंट के सुपर-8 चरण को लेकर भारतीय टीम के स्टार बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव ने प्री-सीडिंग नियम पर अपनी असहमति जाहिर की है। उनका मानना है कि जब टीमें ग्रुप स्टेज में शानदार प्रदर्शन करके अगले दौर में पहुंचती हैं, तो सुपर-8 में उन्हें पहले से तय सीडिंग के आधार पर ग्रुप में रखना पूरी तरह खेल भावना के अनुरूप नहीं है। सूर्यकुमार यादव ने कहा कि क्रिकेट में हर मैच का अपना महत्व होता है और जो टीम उस समय बेहतर प्रदर्शन करती है, उसे उसी आधार पर आगे की राह तय करनी चाहिए। प्री-सीडिंग की वजह से कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है कि ग्रुप स्टेज में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद टीम को कठिन ग्रुप में जाना पड़ता है, जबकि दूसरी टीम को अपेक्षाकृत आसान रास्ता मिल सकता है।
सूर्या ने साफ तौर पर कहा कि खिलाड़ी मैदान पर बराबरी की प्रतिस्पर्धा चाहते हैं। उनका मानना है कि सुपर-8 जैसे अहम चरण में टीमों का वर्गीकरण मौजूदा फॉर्म और ग्रुप स्टेज के परिणामों के आधार पर होना चाहिए, न कि पहले से तय रैंकिंग या ड्रॉ के आधार पर। उन्होंने यह भी जोड़ा कि खिलाड़ी का काम मैदान पर प्रदर्शन करना है, लेकिन टूर्नामेंट का फॉर्मेट भी निष्पक्ष और संतुलित होना चाहिए ताकि किसी टीम को अतिरिक्त लाभ या नुकसान न मिले।
गौरतलब है कि International Cricket Council (ICC) बड़े टूर्नामेंट्स में अक्सर प्री-सीडिंग मॉडल अपनाता है, ताकि प्रसारण, शेड्यूल और संभावित बड़े मुकाबलों को ध्यान में रखा जा सके। हालांकि कई क्रिकेट विशेषज्ञ भी समय-समय पर इस फॉर्मेट पर सवाल उठाते रहे हैं। सूर्यकुमार यादव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सुपर-8 की दौड़ बेहद रोमांचक मानी जा रही है और हर टीम अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी है।
भारतीय फैंस के बीच सूर्या का यह बयान चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोग इसे खेल की पारदर्शिता की मांग के रूप में देख रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि टूर्नामेंट की व्यावसायिक जरूरतों को भी ध्यान में रखना पड़ता है। लेकिन एक बात स्पष्ट है कि सूर्यकुमार यादव जैसे सीनियर खिलाड़ी का यह बयान आईसीसी के फॉर्मेट पर बहस को और तेज कर सकता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि भविष्य में आईसीसी अपने नियमों में कोई बदलाव करता है या मौजूदा व्यवस्था को ही जारी रखता है।



