Rangbhari Ekadashi 2026: जानें कब है रंगभरी एकादशी और क्या है इसका धार्मिक महत्व

रंगभरी एकादशी हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आस्था से जुड़ा पर्व है, जिसे विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। यह पर्व फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है और 2026 में रंगभरी एकादशी मार्च महीने में पड़ने की संभावना है (सटीक तिथि पंचांग के अनुसार तय होगी)। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाशिवरात्रि के बाद जब भगवान शिव माता पार्वती को विवाह के पश्चात पहली बार अपनी नगरी लेकर आते हैं, तब इस दिन उनका भव्य स्वागत किया जाता है। खासतौर पर वाराणसी में इस पर्व का अद्भुत उत्साह देखने को मिलता है। यहां स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा विश्वनाथ और माता गौरा का विशेष श्रृंगार किया जाता है तथा गुलाल और अबीर अर्पित कर रंगों के उत्सव की शुरुआत की जाती है। मान्यता है कि इसी दिन से काशी में होली उत्सव की औपचारिक शुरुआत हो जाती है। श्रद्धालु मानते हैं कि इस दिन भगवान शिव स्वयं भक्तों के साथ रंग खेलते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि और वैवाहिक सौभाग्य का आशीर्वाद देते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, रंगभरी एकादशी का व्रत रखने से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और कुंवारी कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है। इस दिन महिलाएं विशेष रूप से माता पार्वती की पूजा करती हैं और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। मंदिरों में भजन-कीर्तन, शोभायात्रा और विशेष आरती का आयोजन होता है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह पर्व प्रेम, समर्पण और वैवाहिक बंधन की पवित्रता का प्रतीक है। रंगभरी एकादशी हमें यह संदेश देती है कि जीवन में रंग केवल उत्सव के नहीं, बल्कि रिश्तों की मिठास और विश्वास के भी होते हैं। इसलिए यह दिन केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक माना जाता है।



