यूपी में स्मार्ट मीटर शुल्क का असर: बिजली बिल में 100 रुपये से ज्यादा बढ़ोतरी संभव

उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर अब राहत के बजाय अतिरिक्त आर्थिक बोझ का कारण बनते नजर आ रहे हैं। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। सरकार का दावा है कि स्मार्ट मीटर से पारदर्शिता बढ़ेगी, बिजली चोरी पर रोक लगेगी और बिलिंग में त्रुटियां कम होंगी। हालांकि, उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर शुल्क के कारण उनके बिजली बिल में हर महीने 100 रुपये या उससे अधिक की बढ़ोतरी हो सकती है। जानकारी के अनुसार, स्मार्ट मीटर की लागत और मेंटेनेंस शुल्क उपभोक्ताओं से किस्तों में वसूला जा रहा है, जिससे मासिक बिल में अतिरिक्त चार्ज जुड़ रहा है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले जहां उनका बिल एक तय सीमा में आता था, अब उसमें फिक्स चार्ज और मीटर शुल्क जुड़ने से कुल राशि बढ़ रही है। ऊर्जा विभाग का तर्क है कि लंबे समय में स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं को वास्तविक खपत के अनुसार बिल मिलेगा और अनावश्यक अनुमानित बिलिंग से राहत मिलेगी। लेकिन मौजूदा समय में अतिरिक्त भुगतान ने मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शुल्क संरचना को पारदर्शी और संतुलित नहीं बनाया गया तो स्मार्ट मीटर योजना को लेकर असंतोष बढ़ सकता है। फिलहाल उपभोक्ता यह जानना चाहते हैं कि आखिर स्मार्ट मीटर का वास्तविक लाभ उन्हें कब मिलेगा और बढ़े हुए बिल से राहत के लिए सरकार क्या कदम उठाएगी।



