
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के बीच जब भी सैन्य कार्रवाई या कड़े रणनीतिक कदमों की चर्चा होती है, तो पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की आक्रामक नीति को याद किया जाता है। ट्रंप प्रशासन के दौरान ईरान के खिलाफ अधिकतम दबाव की नीति अपनाई गई, जिसमें आर्थिक प्रतिबंधों से लेकर गुप्त सैन्य अभियानों तक की रणनीति शामिल थी। इन्हीं अभियानों में एक नाम चर्चा में रहा—‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’। इस ऑपरेशन का नेतृत्व जिस कमांडर ने किया, उन्हें ट्रंप का “तुरुप का इक्का” माना जाता है। यह कमांडर अमेरिकी सेंट्रल कमांड से जुड़ा एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी था, जिसे मध्य-पूर्व की जमीनी हकीकत, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की रणनीति और क्षेत्रीय मिलिशिया नेटवर्क की गहरी समझ थी। ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ को अत्यंत गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया, जिसका उद्देश्य ईरान समर्थित ठिकानों और सैन्य नेटवर्क को सटीक निशाना बनाना था, बिना बड़े पैमाने पर युद्ध छेड़े। इस मिशन की खासियत थी—हाई-टेक ड्रोन, साइबर इंटेलिजेंस और स्पेशल फोर्सेस का संयोजन। ट्रंप प्रशासन इस तरह के लक्षित अभियानों के जरिए यह संदेश देना चाहता था कि अमेरिका प्रत्यक्ष युद्ध से बचते हुए भी निर्णायक कार्रवाई कर सकता है। विश्लेषकों के मुताबिक, इस कमांडर की कार्यशैली तेज, गोपनीय और परिणाम-केंद्रित रही, जिसने व्हाइट हाउस का भरोसा जीता। ईरान के खिलाफ रणनीतिक दबाव बनाए रखने में उसकी भूमिका अहम मानी जाती है। हालांकि, ऐसे अभियानों ने क्षेत्र में तनाव भी बढ़ाया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी कि क्या यह नीति दीर्घकालिक स्थिरता ला सकती है। फिर भी ट्रंप की विदेश नीति में ऐसे सैन्य अधिकारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही, जो कूटनीति और शक्ति प्रदर्शन के बीच संतुलन साध सकें।



