हेयर स्ट्रेटनिंग और किडनी डैमेज: क्या स्ट्रेटनिंग से हो सकती है डायलिसिस की जरूरत?

हेयर स्ट्रेटनिंग आज के समय में बहुत लोकप्रिय ब्यूटी ट्रीटमेंट बन चुका है। महिलाओं और पुरुषों दोनों के बीच यह एक आम प्रक्रिया है, जिससे बाल सीधे, चिकने और स्टाइलिश दिखते हैं। हालांकि, हाल ही में कई डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि स्ट्रेटनिंग में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स, विशेषकर फॉर्मल्डिहाइड और अन्य स्ट्रॉन्ग केमिकल्स, लंबे समय में स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकते हैं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह किडनी को प्रभावित कर सकता है और कुछ मामलों में डायलिसिस तक की नौबत आ सकती है।
डॉक्टरों के अनुसार, हेयर स्ट्रेटनिंग केमिकल्स को बार-बार स्कैल्प और बालों पर लगाने से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। ये केमिकल्स लिवर और किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं क्योंकि किडनी शरीर से विषाक्त पदार्थों को फिल्टर करती है। यदि किसी व्यक्ति की किडनी पहले से कमजोर है या उसमें कोई प्री-एक्सिस्टिंग किडनी प्रॉब्लम है, तो स्ट्रेटनिंग के केमिकल्स उसके लिए और अधिक खतरनाक हो सकते हैं। कुछ मरीजों में ऐसा देखा गया है कि स्ट्रेटनिंग के बाद यूरिन में प्रोटीन या अन्य संकेत दिखाई देने लगे, जो किडनी डैमेज का शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी को हेयर स्ट्रेटनिंग करवानी है, तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। साथ ही, हल्के या ऑर्गेनिक केमिकल वाले प्रोडक्ट्स चुनना बेहतर रहता है। उन लोगों के लिए यह और भी महत्वपूर्ण है जिनकी उम्र अधिक है या जिनकी किडनी की कार्यक्षमता सामान्य से कम है। स्ट्रेटनिंग के दौरान उचित वेंटिलेशन का होना, हाथ और स्कैल्प की सुरक्षा, और कम फ्रीक्वेंसी से ट्रीटमेंट कराना भी सुरक्षित विकल्प हैं।
अंततः, हेयर स्ट्रेटनिंग एक कॉस्मेटिक प्रक्रिया है, लेकिन इसके स्वास्थ्य पर असर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। डॉक्टरों की सलाह यह है कि बालों की सुंदरता के लिए अपनी किडनी और अन्य आंतरिक अंगों की सुरक्षा खतरे में न डालें। यदि किसी ने स्ट्रेटनिंग करवाई है और उसे बार-बार थकान, सूजन या यूरिन में बदलाव महसूस हो, तो तुरंत नेफ्रोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। सतर्कता और समय पर जांच से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।



