
देश में बढ़ती फर्जी खबरों और भ्रामक सूचनाओं के दौर के बीच उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पत्रकारों से सत्य और तथ्य आधारित पत्रकारिता को अपनाने का आह्वान किया है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए पत्रकारों को निर्भीक और निष्पक्ष रहना होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फेक न्यूज केवल समाज में भ्रम ही नहीं फैलाती, बल्कि संस्थाओं की विश्वसनीयता को भी कमजोर करती है। ऐसे समय में मीडिया कर्मियों का कर्तव्य है कि वे तथ्यों की गहराई से जांच करें और बिना सत्यापन के किसी भी सूचना को प्रसारित न करें।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि डिजिटल युग में सूचना का प्रवाह बहुत तेज हो गया है, जिससे गलत खबरें भी तेजी से फैलती हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के विस्तार ने जहां अभिव्यक्ति को नया आयाम दिया है, वहीं चुनौतियां भी बढ़ाई हैं। उन्होंने पत्रकारों से आग्रह किया कि वे प्रतिस्पर्धा की दौड़ में सच्चाई से समझौता न करें। उन्होंने कहा, “सत्य लिखने का साहस ही पत्रकारिता की असली पहचान है।” उनके अनुसार, मीडिया को न केवल खबरें देने का काम करना चाहिए, बल्कि समाज को जागरूक और जिम्मेदार भी बनाना चाहिए।
अपने संबोधन में उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि लोकतंत्र में प्रेस को चौथे स्तंभ के रूप में देखा जाता है। यदि यह स्तंभ कमजोर होता है, तो लोकतांत्रिक ढांचा भी प्रभावित होता है। इसलिए पत्रकारों को निष्पक्षता, पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन वह तथ्यों पर आधारित और रचनात्मक होनी चाहिए।
अंत में उपराष्ट्रपति ने मीडिया संस्थानों से आंतरिक आचार संहिता को और मजबूत बनाने की अपील की। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय पत्रकारिता की समृद्ध परंपरा आगे भी सत्य, साहस और जिम्मेदारी के मूल्यों को कायम रखेगी। उनके इस संदेश को मीडिया जगत में एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शन के रूप में देखा जा रहा है, जो फर्जी खबरों के खिलाफ एक सशक्त कदम साबित हो सकता है।



