
मध्य-पूर्व में बढ़ते ईरान-इजरायल संघर्ष का असर अब वैश्विक हवाई यात्रा पर भी साफ दिखाई देने लगा है। पिछले चार दिनों के भीतर करीब 1500 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द या डायवर्ट की जा चुकी हैं। सुरक्षा कारणों और बढ़ते सैन्य तनाव के चलते कई एयरलाइंस ने मध्य-पूर्व के संवेदनशील हवाई क्षेत्र से होकर गुजरने वाली उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया है। इससे न केवल यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि वैश्विक विमानन उद्योग पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है।
इसी बीच भारत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने भी स्थिति को देखते हुए एयरलाइंस के लिए एडवायजरी जारी की है। DGCA ने सभी भारतीय एयरलाइंस से कहा है कि वे हाई-रिस्क जोन वाले हवाई क्षेत्रों से गुजरने से पहले सुरक्षा आकलन जरूर करें और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। साथ ही एयरलाइंस को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की ताजा जानकारी के आधार पर अपने ऑपरेशन को संचालित करने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता सैन्य तनाव हवाई मार्गों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस पहले ही इजरायल, ईरान और आसपास के देशों के ऊपर से उड़ान भरने से बच रही हैं। कुछ फ्लाइट्स को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे उड़ान का समय और ईंधन लागत दोनों बढ़ रहे हैं। इसका असर टिकट कीमतों पर भी पड़ सकता है।
यात्रियों को भी सलाह दी गई है कि वे अपनी फ्लाइट की स्थिति पहले से जांच लें और एयरलाइंस के आधिकारिक अपडेट पर नजर रखें। एयरपोर्ट अधिकारियों का कहना है कि हालात के अनुसार उड़ानों के शेड्यूल में अचानक बदलाव संभव है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान-इजरायल तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो वैश्विक उड्डयन और पर्यटन उद्योग पर इसका बड़ा आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया भर की विमानन एजेंसियां स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठा रही हैं।



