मेट्रो में AC कितने नंबर पर चलता है? बार-बार दरवाजे खुलने पर भी क्यों नहीं होती गर्मी

मेट्रो में सफर करते समय अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर मेट्रो ट्रेन में एसी कितने नंबर पर चलता है और जब हर स्टेशन पर बार-बार दरवाजे खुलते हैं तो अंदर गर्मी क्यों नहीं लगती। दरअसल मेट्रो ट्रेनों में इस्तेमाल होने वाला एयर कंडीशनिंग सिस्टम सामान्य घरों या दफ्तरों में लगे एसी से बिल्कुल अलग और ज्यादा एडवांस होता है। आमतौर पर मेट्रो के अंदर का तापमान लगभग 22 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रखा जाता है ताकि यात्रियों को आरामदायक माहौल मिल सके। मेट्रो के कोच में हाई कैपेसिटी का एसी सिस्टम लगा होता है जो लगातार पूरे डिब्बे की हवा को ठंडा करता रहता है। इसके साथ ही ट्रेन के अंदर स्मार्ट सेंसर भी लगे होते हैं जो यात्रियों की संख्या और बाहर के तापमान के हिसाब से कूलिंग को अपने-आप एडजस्ट कर देते हैं। यही वजह है कि भीड़ ज्यादा होने पर भी अंदर का तापमान संतुलित बना रहता है।
अब सवाल आता है कि जब हर स्टेशन पर दरवाजे खुलते हैं तो गर्म हवा अंदर क्यों नहीं भर जाती। इसका कारण मेट्रो के खास डिजाइन और पावरफुल एयर फ्लो सिस्टम में छिपा है। दरअसल मेट्रो के एसी में इतना ज्यादा एयर सर्कुलेशन होता है कि जैसे ही दरवाजे खुलते हैं, बाहर की गर्म हवा को तुरंत कंट्रोल कर लिया जाता है और ठंडी हवा पूरे डिब्बे में तेजी से फैल जाती है। इसके अलावा मेट्रो के दरवाजे भी बहुत कम समय के लिए खुलते हैं, जिससे ज्यादा गर्म हवा अंदर आने का मौका ही नहीं मिलता। कई मेट्रो ट्रेनों में प्रेशर कंट्रोल सिस्टम भी होता है, जो बाहर और अंदर की हवा के दबाव को संतुलित रखता है। इससे ट्रेन के अंदर ठंडक बनी रहती है।
इसके अलावा मेट्रो कोच पूरी तरह से सील्ड और इंसुलेटेड बनाए जाते हैं, जिससे बाहर की गर्मी का असर कम से कम अंदर पहुंचता है। छत और दीवारों में खास तरह की इंसुलेशन सामग्री लगाई जाती है जो गर्मी को रोकने में मदद करती है। यही वजह है कि चाहे गर्मियों का मौसम हो या ट्रेन में भीड़ ज्यादा हो, मेट्रो के अंदर यात्रियों को हमेशा ठंडा और आरामदायक माहौल मिलता है। इसलिए अगली बार जब आप मेट्रो में सफर करें और दरवाजे बार-बार खुलते देखें, तो समझ लीजिए कि इसके पीछे बेहद एडवांस तकनीक काम कर रही है जो यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर बनाई गई है।



