
महाराष्ट्र सरकार ने धर्म परिवर्तन यानी मतांतरण को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट ने ऐसे प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसके तहत अब किसी भी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन करने से पहले प्रशासन को 60 दिन पहले नोटिस देना होगा। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य जबरन, लालच या दबाव में कराए जाने वाले मतांतरण पर रोक लगाना है। प्रस्तावित नियम के अनुसार, जो व्यक्ति अपना धर्म बदलना चाहता है, उसे जिला प्रशासन को निर्धारित प्रारूप में आवेदन देना होगा। इसके बाद प्रशासन इस आवेदन की जांच करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि धर्म परिवर्तन पूरी तरह से स्वेच्छा से किया जा रहा है, न कि किसी दबाव, प्रलोभन या धोखे के तहत।
सरकार का मानना है कि कई बार आर्थिक लालच, शादी या अन्य कारणों से लोगों को धर्म बदलने के लिए मजबूर किया जाता है। ऐसे मामलों को रोकने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह नियम लाया जा रहा है। अगर कोई व्यक्ति बिना सूचना दिए धर्म परिवर्तन करता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। इस प्रस्ताव के तहत धर्म परिवर्तन कराने वाले व्यक्ति या संस्था को भी प्रशासन को पहले से जानकारी देनी होगी।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इस प्रस्ताव को विधेयक के रूप में विधानसभा में पेश किया जा सकता है। कानून बनने के बाद यह पूरे महाराष्ट्र में लागू होगा। सरकार का दावा है कि इससे अवैध और जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों पर लगाम लगेगी और समाज में पारदर्शिता बढ़ेगी। हालांकि इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस भी शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर अंकुश मान रहे हैं, जबकि सरकार और इसके समर्थकों का कहना है कि यह कदम केवल अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए उठाया गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और राजनीतिक चर्चा देखने को मिल सकती है।



