PCOS और वजन कम करने की मिथक सलाह: ‘कम खाओ, ज्यादा चलो’ क्यों काम नहीं करती

PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन और मेटाबॉलिक बदलाव का एक सामान्य कारण है। इस स्थिति में अक्सर महिलाओं को सलाह दी जाती है कि “कम खाओ और ज्यादा कसरत करो” ताकि वजन कम हो और हार्मोन संतुलित रहें। लेकिन, यह क्लासिक सलाह PCOS में अक्सर फेल क्यों हो जाती है, इसे समझना बहुत ज़रूरी है।
सबसे पहले, PCOS में इंसुलिन रेजिस्टेंस एक आम समस्या है। इसका मतलब है कि शरीर में इंसुलिन का सही उपयोग नहीं हो पाता और ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं रहती। जब ब्लड शुगर संतुलित नहीं रहती, तो शरीर ज्यादा भूख महसूस करता है और फैट स्टोर करने लगता है। ऐसे में सिर्फ कैलोरी कम करना अक्सर पर्याप्त नहीं होता।
दूसरी वजह है हार्मोनल असंतुलन। PCOS में एण्ड्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ा होता है, जिससे मासिक धर्म अनियमित होता है, बालों का झड़ना या चेहरे पर अधिक बाल आने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। हार्मोन असंतुलन के कारण मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है, और सामान्य खाने-पीने और एक्सरसाइज के नियमों का असर कम हो जाता है।
तीसरी वजह है तनाव और नींद की कमी। PCOS महिलाओं में कॉर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर अक्सर ऊँचा रहता है। नींद कम होने पर भी इंसुलिन और भूख नियंत्रक हार्मोन प्रभावित होते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि महिलाओं को भूख अधिक लगती है और वजन कम करना मुश्किल हो जाता है।
इसलिए, डॉक्टर अक्सर सिर्फ डाइट कम करने और एक्सरसाइज करने की बजाय एक समग्र रणनीति अपनाने की सलाह देते हैं। इसमें संतुलित और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली डाइट, रेगुलर और मॉडरेट एक्सरसाइज, नींद और तनाव प्रबंधन, और कभी-कभी मेडिकेशन भी शामिल हो सकता है। कुछ मामलों में हार्मोनल सपोर्ट और इंसुलिन सेंसिटाइज़र दवाइयाँ भी असर दिखा सकती हैं।
कुल मिलाकर, PCOS में वजन घटाना केवल कैलोरी कटौती या जिम करने से नहीं होता। यह हार्मोनल, मेटाबॉलिक और लाइफस्टाइल फैक्टर्स का एक जटिल मिश्रण है। इसलिए महिलाएं जब भी PCOS के लिए वजन कम करने की योजना बनाएं, तो डॉक्टर या डायटिशियन की गाइडलाइन के अनुसार व्यक्तिगत प्लान अपनाएं। सही रणनीति से ही लंबे समय में स्थायी और स्वस्थ परिणाम मिलते हैं।



