
मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार संसद में अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करने जा रही है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर लोकसभा में इस मुद्दे पर विस्तृत बयान देंगे और बताएंगे कि मौजूदा संकट पर भारत की क्या नीति है। सरकार का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मिडिल ईस्ट में चल रहे घटनाक्रम का असर वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार लोकसभा में दिए जाने वाले बयान में विदेश मंत्री जयशंकर मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति, भारत के कूटनीतिक प्रयासों और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे। सरकार विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए यह भी बताएगी कि भारत इस संकट को शांत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर क्या भूमिका निभा रहा है।
भारत का मिडिल ईस्ट के देशों के साथ लंबे समय से मजबूत कूटनीतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं और भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा भी इसी क्षेत्र से पूरा होता है। ऐसे में वहां बढ़ता तनाव भारत के लिए एक अहम रणनीतिक मुद्दा बन जाता है। इसी कारण सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर आवश्यक कदम उठाने की तैयारी में है।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि भारत हमेशा से शांति, संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान का समर्थक रहा है। भारत का रुख स्पष्ट है कि क्षेत्र में किसी भी तरह का संघर्ष बढ़ने के बजाय बातचीत के माध्यम से हल निकाला जाना चाहिए। यही संदेश लोकसभा में विदेश मंत्री के बयान में भी सामने आ सकता है।
संसद में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान विपक्षी दल भी सरकार से कई सवाल पूछ सकते हैं, जिनमें भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, तेल आपूर्ति पर संभावित असर और भारत की विदेश नीति की दिशा जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। सरकार इन सभी मुद्दों पर विस्तार से अपनी स्थिति रखेगी।



