Gangaur 2026 Date: गणगौर कब है? देवी गौरी की पूजा क्यों की जाती है, जानें पूरा महत्व

Gangaur 2026: हिंदू धर्म में गणगौर का पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह त्योहार माता पार्वती यानी देवी गौरी और भगवान शिव की पूजा को समर्पित होता है। विशेष रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर भारत के कई हिस्सों में यह पर्व बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए जबकि अविवाहित लड़कियां मनचाहा वर पाने के लिए देवी गौरी की पूजा करती हैं।
गणगौर 2026 कब है?
साल 2026 में गणगौर का त्योहार चैत्र शुक्ल तृतीया के दिन मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार यह तिथि होली के दूसरे दिन से शुरू होकर लगभग 16 दिनों तक चलने वाले उत्सव का समापन दिवस होता है। इस दिन महिलाएं विधि-विधान से देवी गौरी और भगवान शिव की पूजा करती हैं और घर-परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।
गणगौर का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता गौरी ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। इसी कारण गणगौर का त्योहार वैवाहिक सुख, प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। विवाहित महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं। वहीं कुंवारी कन्याएं अच्छे और योग्य जीवनसाथी की कामना करती हैं।
पूजा की तैयारी कैसे करें
गणगौर के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ-सुथरे वस्त्र पहनने चाहिए। इसके बाद घर में साफ स्थान पर देवी गौरी और भगवान शिव की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है। कई जगहों पर मिट्टी से गौरी-शंकर की प्रतिमा भी बनाई जाती है। पूजा स्थल को फूल, रोली, चावल, मेहंदी और हल्दी से सजाया जाता है। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा पहनकर पूजा की तैयारी करती हैं।
गणगौर पूजा विधि
सबसे पहले देवी गौरी और भगवान शिव को जल, रोली, चावल, फूल और सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद गणगौर की कथा सुनी जाती है और आरती की जाती है। महिलाएं पारंपरिक गीत गाती हैं और माता गौरी से सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मांगती हैं। पूजा के बाद प्रसाद बांटा जाता है और कई स्थानों पर गणगौर की शोभायात्रा भी निकाली जाती है।



