Electric Vehicle का क्रेज बढ़ा, जानें बीते छह सालों में भारत में कितने EV रजिस्टर हुए

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) की मांग तेजी से बढ़ रही है। पर्यावरण संरक्षण, बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतें और सरकार की प्रोत्साहन नीतियों के चलते लोग अब इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। पिछले छह वर्षों के आंकड़े इस बदलाव को साफ तौर पर दर्शाते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 से 2025 के बीच देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन में कई गुना वृद्धि हुई है। जहां 2019 में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी, वहीं अब यह लाखों की संख्या पार कर चुकी है।
आंकड़ों के मुताबिक बीते छह वर्षों में भारत में करीब 40 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण हो चुका है। इनमें इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, कार और बसें शामिल हैं। खास बात यह है कि सबसे ज्यादा वृद्धि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर सेगमेंट में देखने को मिली है। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ अब छोटे शहरों और कस्बों में भी EV का इस्तेमाल बढ़ रहा है। कई लोग रोजाना के सफर के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक को बेहतर विकल्प मान रहे हैं।
सरकार भी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है। FAME (Faster Adoption and Manufacturing of Electric Vehicles) जैसी योजनाओं के तहत सब्सिडी देकर इलेक्ट्रिक वाहनों को सस्ता बनाया जा रहा है। इसके अलावा कई राज्य सरकारें रोड टैक्स में छूट, रजिस्ट्रेशन फीस में राहत और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर काम कर रही हैं। इससे आम लोगों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना पहले से ज्यादा आसान हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या और तेजी से बढ़ेगी। बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां भी लगातार नए EV मॉडल लॉन्च कर रही हैं और बैटरी तकनीक को बेहतर बनाने पर जोर दे रही हैं। साथ ही देशभर में चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क भी तेजी से विकसित हो रहा है। इन सभी कारणों से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दशक में भारत की सड़कों पर बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक वाहन नजर आएंगे और यह बदलाव देश को स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन की दिशा में आगे बढ़ाएगा।



