लाइफस्टाइलस्वास्थ्य
डॉ. हैनिमैन और होम्योपैथी की शुरुआत: मलेरिया दवा से जुड़ा दिलचस्प इतिहास


होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति की शुरुआत 18वीं सदी के अंत में जर्मन चिकित्सक डॉ. सैम्युअल हैनिमैन द्वारा की गई मानी जाती है। कहा जाता है कि उन्होंने उस समय प्रचलित मलेरिया की दवा क्विनीन (Peruvian bark) पर स्वयं प्रयोग किया और पाया कि स्वस्थ व्यक्ति में यह दवा मलेरिया जैसे लक्षण उत्पन्न कर सकती है।
इसी अनुभव से उन्हें “Like cures like” यानी “जैसा रोग, वैसा उपचार” का सिद्धांत मिला, जिसके आधार पर उन्होंने होम्योपैथी चिकित्सा प्रणाली विकसित की। इस पद्धति में दवाओं को अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में दिया जाता है ताकि शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता को सक्रिय किया जा सके।
हैनिमैन ने आगे चलकर कई प्रयोग किए और अपने निष्कर्षों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया, जिससे होम्योपैथी एक स्वतंत्र चिकित्सा प्रणाली के रूप में स्थापित हुई।
आज भी यह पद्धति दुनिया के कई देशों में वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में अपनाई जाती है, हालांकि इस पर वैज्ञानिक बहस भी लगातार जारी रहती है।