
Taiwan में 1000 भारतीय कामगारों के पहले जत्थे के पहुंचने की योजना को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस फैसले के खिलाफ स्थानीय स्तर पर विरोध तेज हो गया है और हजारों लोगों ने इसे लेकर नाराजगी जताई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस योजना के तहत भारत से कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के लिए भेजा जाना है। लेकिन स्थानीय लोगों का एक वर्ग इसे रोजगार प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देख रहा है, जिससे विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।
करीब 34 हजार लोगों द्वारा जताए गए विरोध को लेकर सरकार और प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। हालांकि समर्थकों का कहना है कि विदेशी श्रमिकों की जरूरत उद्योगों की मांग को पूरा करने के लिए जरूरी है।
Taiwan सरकार का कहना है कि देश में कई सेक्टर्स जैसे मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन और केयर इंडस्ट्री में श्रमिकों की भारी कमी है, जिसे पूरा करने के लिए विदेशी कामगारों को आमंत्रित करना जरूरी हो गया है। इसी नीति के तहत भारत से पहले जत्थे के रूप में 1000 कामगारों को लाने की योजना बनाई गई है।
वहीं, स्थानीय ट्रेड यूनियनों और कुछ राजनीतिक समूहों का तर्क है कि इससे घरेलू रोजगार पर दबाव बढ़ सकता है और वेतन स्तर पर भी असर पड़ सकता है। इसी कारण विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं और सरकार पर इस फैसले की समीक्षा करने का दबाव बनाया जा रहा है।
भारत और Taiwan के बीच यह श्रमिक सहयोग समझौता लंबे समय से चर्चा में था, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच रोजगार और कौशल आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पारदर्शी नीति और सही नियमन के साथ इस योजना को लागू किया जाए, तो यह दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, लेकिन स्थानीय असंतोष को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।



