
15 अप्रैल 2026 को बुध प्रदोष व्रत के अवसर पर चौघड़िया मुहूर्त का विशेष महत्व माना जा रहा है। इस दिन लोग शुभ कार्यों की शुरुआत करने से पहले दिन और रात के चौघड़िया समय को ध्यान में रखते हैं ताकि कार्यों में सफलता और सकारात्मक परिणाम मिल सकें। चौघड़िया में दिन को अलग-अलग समय खंडों में बांटा जाता है, जिनमें कुछ समय शुभ और कुछ अशुभ माने जाते हैं।
आज के दिन राहुकाल के समय को विशेष रूप से अशुभ माना जाता है, इसलिए इस अवधि में किसी भी नए कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। वहीं शुभ चौघड़िया जैसे अमृत, शुभ और लाभ के समय को पूजा-पाठ, निवेश और महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। बुध प्रदोष व्रत के कारण शाम का प्रदोष काल भी अत्यंत पुण्यकारी माना गया है, जिसमें भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व होता है।
चौघड़िया मुहूर्त के अनुसार दिन की शुरुआत में आने वाला “उद्वेग” और “काल” समय अशुभ कार्यों से बचने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, जबकि “चर”, “लाभ” और “अमृत” जैसे समय को यात्रा, व्यापार और नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ बताया गया है। इसलिए लोग अपने दैनिक कार्यों की योजना इन्हीं समयों के अनुसार बनाते हैं ताकि बाधाओं से बचा जा सके।
आज बुध प्रदोष व्रत होने के कारण शाम का समय विशेष रूप से फलदायी माना जा रहा है। प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से मानसिक शांति, कष्टों से मुक्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। भक्त इस समय दीप जलाकर और मंत्र जाप करके शुभ फल की कामना करते हैं।
इसके अलावा, ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि चौघड़िया और पंचांग के अनुसार कार्य करने से व्यक्ति के जीवन में अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। हालांकि आधुनिक समय में इसे आस्था और परंपरा के रूप में अधिक देखा जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में इसका विशेष महत्व आज भी बना हुआ है।



