UP में पुरानी गाड़ियों के नियम बदले: डीलरों को सर्टिफिकेट अनिवार्य, 5 साल वैधता

उत्तर प्रदेश सरकार ने पुरानी गाड़ियों की खरीद-बिक्री से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब सेकेंड हैंड वाहन डीलरों के लिए एक निर्धारित सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य कर दिया गया है। यह कदम वाहन लेन-देन को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
परिवहन विभाग के अनुसार, यह सर्टिफिकेट डीलरों को तभी जारी किया जाएगा जब वे सभी निर्धारित मानकों और शर्तों को पूरा करेंगे। इसकी वैधता 5 साल तक होगी, जिसके बाद इसे नवीनीकृत कराना जरूरी होगा।
इस बदलाव से फर्जीवाड़े और अवैध वाहन बिक्री पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही खरीदारों को भी अब अधिक सुरक्षित और प्रमाणित डीलरों से वाहन खरीदने का विकल्प मिलेगा।
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से सेकेंड हैंड वाहन बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों का भरोसा मजबूत होगा। नई व्यवस्था के तहत डीलरों को अपने व्यवसाय का पूरा रिकॉर्ड भी व्यवस्थित रखना होगा, जिसमें खरीदी और बिक्री किए गए वाहनों का पूरा विवरण शामिल होगा। इसके साथ ही हर लेन-देन को डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज करना अनिवार्य किया जा सकता है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की जांच आसानी से की जा सके।
परिवहन विभाग यह भी सुनिश्चित करेगा कि केवल वही डीलर बाजार में सक्रिय रहें जो नियमों का पालन करते हैं और जिनके पास वैध प्रमाणपत्र है। बिना प्रमाणपत्र के वाहन कारोबार करने वालों पर कार्रवाई का भी प्रावधान रखा गया है, जिसमें जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई शामिल हो सकती है।
इस फैसले से न सिर्फ ग्राहकों को सुरक्षा मिलेगी बल्कि संगठित तरीके से वाहन बाजार को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सेकेंड हैंड वाहनों की खरीद-बिक्री में होने वाली धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आएगी।
आने वाले समय में इस प्रणाली को और अधिक डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए मॉनिटर की जा सके।



