धर्म-आस्था
सिख धर्म में महिलाओं को बाल क्यों नहीं काटने दिए जाते? जानें धार्मिक महत्व


सिख धर्म में Sikhism के अनुयायियों के लिए केश (बाल) अत्यंत पवित्र माने जाते हैं। इसे ईश्वर द्वारा दी गई प्राकृतिक अवस्था का हिस्सा समझा जाता है, जिसे बदलना या काटना धार्मिक अनुशासन के विरुद्ध माना जाता है।
यह परंपरा “पांच ककार” (Five Ks) में शामिल केश से जुड़ी है, जिसे गुरु गोबिंद सिंह जी ने सिख अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक पहचान और अनुशासन का प्रतीक बनाया था। इसी कारण पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं के लिए भी बाल न काटने की परंपरा का पालन कई सिख समुदायों में देखा जाता है।
इसका उद्देश्य प्राकृतिक रूप को स्वीकार करना, विनम्रता बनाए रखना और अहंकार से दूर रहना माना जाता है। हालांकि आज के समय में इस परंपरा का पालन व्यक्तिगत आस्था और परिवारिक परंपराओं के अनुसार अलग-अलग रूप में देखा जाता है।