धर्म-आस्था
वट सावित्री व्रत कथा हिंदी में: सावित्री-सत्यवान की पौराणिक कहानी


Vat Savitri Vrat की पौराणिक कथा सावित्री और सत्यवान की अमर प्रेम और अटूट संकल्प की कहानी पर आधारित है। मान्यता है कि सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से भी वापस ले लिए थे, जो उनकी भक्ति, बुद्धि और दृढ़ निश्चय का प्रतीक माना जाता है।
कथा के अनुसार, सत्यवान की मृत्यु निश्चित थी, लेकिन सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे कठोर व्रत और तप किया। जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे, तो सावित्री ने अपने विवेक और धर्मनिष्ठा से उन्हें प्रभावित किया और अपने पति के प्राण वापस पाने में सफल हुई। यही कारण है कि यह व्रत सौभाग्य और वैवाहिक जीवन की लंबी उम्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस कथा का पाठ और श्रवण वट सावित्री व्रत के दौरान विशेष पुण्यदायी माना जाता है और इसे भक्ति, समर्पण और नारी शक्ति का प्रतीक कहा जाता है।