तेल आयात घटाने की तैयारी में भारत, 5,000 एथनॉल ईंधन स्टेशन खोलने की योजना

भारत विदेशी कच्चे तेल के आयात पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक और स्वदेशी ईंधन स्रोतों को तेजी से बढ़ावा दे रहा है। इसी दिशा में पेट्रोलियम मंत्री ने देशभर में 5,000 एथनॉल ईंधन स्टेशन स्थापित करने की योजना का उल्लेख किया है। सरकार का मानना है कि एथनॉल आधारित ईंधन के व्यापक उपयोग से न केवल तेल आयात का बोझ कम होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
एथनॉल एक जैव ईंधन है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होने के साथ-साथ किसानों को भी अतिरिक्त आय के अवसर मिल रहे हैं। सरकार का लक्ष्य एथनॉल उत्पादन और वितरण नेटवर्क को और मजबूत बनाना है।
पेट्रोलियम मंत्री के अनुसार, 5,000 एथनॉल ईंधन स्टेशन स्थापित होने से वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को पारंपरिक ईंधन के विकल्प मिल सकेंगे। यह पहल देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयासों को भी गति देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि एथनॉल आधारित ईंधन का विस्तार भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में सरकार लगातार नई नीतियां और योजनाएं लागू कर रही है। एथनॉल ईंधन स्टेशनों का विस्तार इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य आयातित तेल पर निर्भरता घटाना, पर्यावरण को बेहतर बनाना और देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।



