मातृ मृत्यु दर घटाने को अपनाएगा तमिलनाडु मॉडल

उत्तर प्रदेश में मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Rate) को और कम करने के लिए राज्य सरकार तमिलनाडु के सफल स्वास्थ्य मॉडल को अपनाने की तैयारी कर रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना है।
स्वास्थ्य विभाग की योजना के अनुसार अधिक से अधिक प्रसव मेडिकल कॉलेजों और उन्नत स्वास्थ्य संस्थानों में कराए जाएंगे। इससे जटिल मामलों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी और प्रसव के दौरान होने वाले जोखिमों को कम किया जा सकेगा।
तमिलनाडु लंबे समय से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल रहा है। वहां रेफरल सिस्टम, संस्थागत प्रसव और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के बेहतर समन्वय को मातृ मृत्यु दर में कमी का प्रमुख कारण माना जाता है।
उत्तर प्रदेश में भी गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी, जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान और उन्हें उच्च स्तरीय चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। इसके लिए जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि संस्थागत प्रसव की संख्या बढ़ने से प्रसव संबंधी जटिलताओं का समय पर उपचार संभव होगा। इससे माताओं और नवजात शिशुओं दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
सरकार का लक्ष्य है कि राज्य में मातृ मृत्यु दर को राष्ट्रीय औसत से भी नीचे लाया जाए। इसके लिए चिकित्सा ढांचे को मजबूत करने, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता बढ़ाने और जागरूकता कार्यक्रमों को व्यापक बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि तमिलनाडु मॉडल के प्रमुख तत्वों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो उत्तर प्रदेश में मातृ स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।



