आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026: 15 जुलाई से शुरू, जानें पूजा मुहूर्त, विधि और नियम

आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 15 जुलाई 2026 से होने जा रहा है। हिंदू धर्म में गुप्त नवरात्रि को विशेष साधना और आध्यात्मिक साधना का समय माना जाता है। इस दौरान मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों और दस महाविद्याओं की आराधना करने की परंपरा है।
गुप्त नवरात्रि में साधक विशेष मंत्र जाप, पूजा और ध्यान करते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में श्रद्धा और नियमों के साथ की गई पूजा से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
गुप्त नवरात्रि की पूजा के लिए सबसे पहले घर या पूजा स्थान की साफ-सफाई की जाती है। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर दीप प्रज्वलित किया जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार कलश स्थापना, मंत्र जाप और पूजा-पाठ करते हैं।
इस दौरान सात्विक भोजन करने, नियमित पूजा करने और सकारात्मक विचार बनाए रखने का महत्व बताया गया है। कई साधक उपवास रखते हैं और मां दुर्गा की आराधना में समय व्यतीत करते हैं।
गुप्त नवरात्रि के दौरान पूजा करते समय शुद्धता और नियमों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। पूजा में लाल रंग के वस्त्र, पुष्प और देवी को प्रिय मानी जाने वाली सामग्री अर्पित करने की परंपरा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि साधना और भक्ति का पर्व है। भक्त इस दौरान मां दुर्गा से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। पूजा-पाठ और धार्मिक विधियां आस्था और परंपराओं से जुड़ी होती हैं।



