चातुर्मास 2026: 25 जुलाई से शुरू, जानें नमक, तेल और सोने से जुड़े धार्मिक नियम

हिंदू पंचांग के अनुसार चातुर्मास का आरंभ 25 जुलाई 2026 से माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं में इस अवधि को भगवान विष्णु की भक्ति, पूजा-पाठ, दान और आत्मसंयम के लिए विशेष समय बताया गया है। मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और इस दौरान धार्मिक साधना का महत्व बढ़ जाता है।
चातुर्मास में कई लोग अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार कुछ वस्तुओं के सेवन और उपयोग को लेकर नियमों का पालन करते हैं। ये नियम अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में अलग हो सकते हैं।
नमक से जुड़े नियम
कुछ धार्मिक परंपराओं में चातुर्मास के दौरान नमक के सेवन को सीमित करने या विशेष प्रकार के व्रत में नमक त्यागने की मान्यता है। हालांकि, यह सभी लोगों के लिए अनिवार्य नियम नहीं माना जाता।
तेल से जुड़े नियम
कई लोग इस अवधि में तेल से बने भोजन या कुछ विशेष तेलों के उपयोग में संयम रखते हैं। इसका उद्देश्य सात्विक जीवनशैली अपनाना माना जाता है।
सोना और शुभ कार्य
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास में विवाह जैसे मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है। हालांकि, सोने-चांदी की खरीद या अन्य कार्यों को लेकर मान्यताएं स्थान और परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।
भगवान विष्णु की पूजा
इस दौरान विष्णु भगवान की पूजा, विष्णु मंत्रों का जाप, दान-पुण्य और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करने की परंपरा है। भक्त भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति के लिए व्रत और साधना करते हैं।
नोट: चातुर्मास से जुड़े नियम धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में इनके पालन के तरीके भिन्न हो सकते हैं।



