हरियाली अमावस्या 2026: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना गया है। सावन मास में पड़ने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 12 अगस्त को मनाया जाएगा। यह दिन भगवान शिव की आराधना, पितरों के स्मरण और प्रकृति के संरक्षण से जुड़ा माना जाता है।
हरियाली अमावस्या के दिन लोग सुबह स्नान करने के बाद भगवान शिव, माता पार्वती और अन्य देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति से पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है।
शुभ मुहूर्त:
हरियाली अमावस्या पर पूजा और धार्मिक कार्यों के लिए शुभ समय जानने के लिए पंचांग के अनुसार स्थानीय समय का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि तिथि और मुहूर्त स्थान के अनुसार थोड़ा अलग हो सकते हैं।
इस पर्व का सबसे खास संबंध हरियाली और पर्यावरण से है। इस दिन पेड़-पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने की परंपरा भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वृक्षों में देवी-देवताओं का वास माना जाता है, इसलिए पौधारोपण को पुण्य कार्य माना जाता है।
हरियाली अमावस्या के दिन कई लोग जरूरतमंदों को दान करते हैं और पितरों की शांति के लिए पूजा-पाठ व तर्पण करते हैं। मंदिरों में विशेष पूजा और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है।
यह पर्व हमें प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। सावन की हरियाली के बीच मनाया जाने वाला यह त्योहार आस्था, परंपरा और प्रकृति के सुंदर संबंध को दर्शाता है।



