Gorakhpur-Hyderabad Amrit Bharat Express: लखनऊ होकर चलेगी नई ट्रेन, देखें रूट और टाइमिंग

पूर्वी उत्तर प्रदेश से दक्षिण भारत की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने बड़ी सौगात दी है। गोरखपुर से हैदराबाद के चारलापल्ली टर्मिनल तक नई अमृत भारत एक्सप्रेस चलाने को रेलवे बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। ट्रेन नंबर 22075/22076 के संचालन की तैयारी पूर्वोत्तर रेलवे ने शुरू कर दी है। यह गोरखपुर से हैदराबाद के बीच पहली सीधी ट्रेन सेवा होगी।
लखनऊ और कानपुर होकर जाएगी ट्रेन
नई अमृत भारत एक्सप्रेस का रूट उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहरों को दक्षिण भारत से जोड़ेगा। ट्रेन गोंडा, बाराबंकी, गोमतीनगर, लखनऊ सिटी, ऐशबाग, कानपुर सेंट्रल, उरई और झांसी होते हुए आगे बढ़ेगी। इसके बाद बीना, भोपाल, इटारसी, बैतूल, नागपुर, चंदरपुर, बल्लारशाह और काजीपेट पर ठहराव होगा।
इस रूट से लखनऊ और कानपुर के यात्रियों को भी हैदराबाद के लिए सीधी ट्रेन कनेक्टिविटी मिलेगी। खासकर छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और दक्षिण भारत आने-जाने वाले यात्रियों को इसका फायदा मिलने की उम्मीद है।
सप्ताह में एक दिन चलेगी
रेलवे बोर्ड ने फिलहाल इस ट्रेन को सप्ताह में एक दिन चलाने की अनुमति दी है। मांग बढ़ने पर भविष्य में इसके फेरे बढ़ाए जा सकते हैं। रेलवे की ओर से ट्रेन नंबर 22075/22076 के संचालन की तैयारी शुरू हो चुकी है।
क्या होगी टाइमिंग?
गोरखपुर से हैदराबाद (ट्रेन 22076):
- प्रस्थान: रविवार सुबह 8:00 बजे
- हैदराबाद पहुंचने का समय: दूसरे दिन शाम 5:00 बजे
हैदराबाद से गोरखपुर (ट्रेन 22075):
- प्रस्थान: शुक्रवार रात 9:45 बजे
- गोरखपुर पहुंचने का समय: तीसरे दिन सुबह 6:25 बजे
22 कोच और 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार
रिपोर्ट के मुताबिक अमृत भारत एक्सप्रेस में 22 कोच होंगे और इसकी अधिकतम रफ्तार 130 किमी प्रति घंटा तक होगी। ट्रेन में करीब 1,834 यात्रियों के सफर की क्षमता बताई गई है। इसमें CCTV कैमरे, टॉक-बैक सिस्टम, बायो-टॉयलेट और आरामदायक सीट जैसी सुविधाएं भी होंगी।
यात्रियों को कितना फायदा?
गोरखपुर से हैदराबाद के बीच सीधी ट्रेन मिलने से पूर्वांचल के यात्रियों को कनेक्टिंग ट्रेन बदलने की जरूरत कम होगी। वहीं लखनऊ, कानपुर, झांसी, भोपाल और नागपुर जैसे बड़े शहर भी इस कनेक्टिविटी से सीधे जुड़ेंगे।
फिलहाल रेलवे ने इसे साप्ताहिक सेवा के तौर पर मंजूरी दी है। अगर यात्रियों की मांग अच्छी रहती है तो आने वाले समय में फेरों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।



