राखी में क्यों लगाई जाती हैं 3 गांठें? जानें ब्रह्मा, विष्णु और महेश से जुड़ा रहस्य

रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का पर्व है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके सुखी, स्वस्थ एवं समृद्ध जीवन की कामना करती है। राखी बांधते समय तीन गांठें लगाने की परंपरा भी प्रचलित है। ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं में इन गांठों को बेहद शुभ माना गया है।
पहली गांठ का संबंध ब्रह्मा जी से
धार्मिक मान्यता के अनुसार राखी की पहली गांठ ब्रह्मा जी को समर्पित मानी जाती है। ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता माना जाता है। इसलिए पहली गांठ भाई-बहन के रिश्ते में नई ऊर्जा, सुख और समृद्धि की कामना का प्रतीक मानी जाती है।
दूसरी गांठ भगवान विष्णु के नाम
दूसरी गांठ का संबंध भगवान विष्णु से जोड़ा जाता है। विष्णु को पालनकर्ता माना जाता है। मान्यता है कि यह गांठ भाई की रक्षा, दीर्घायु और जीवन में स्थिरता की कामना का प्रतीक है।
तीसरी गांठ महेश यानी शिव को समर्पित
तीसरी गांठ भगवान शिव यानी महेश से संबंधित मानी जाती है। शिव को संहार और परिवर्तन का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह गांठ जीवन से नकारात्मकता दूर होने और भाई-बहन के रिश्ते पर आने वाली परेशानियों से रक्षा की कामना को दर्शाती है।
तीन गांठों का एक और धार्मिक अर्थ
कुछ परंपराओं में राखी की तीन गांठों को मन, वचन और कर्म से जुड़े संकल्प के रूप में भी देखा जाता है। यानी भाई-बहन एक-दूसरे के प्रति अपने प्रेम, सम्मान और जिम्मेदारी को मन, वचन और कर्म से निभाने का संकल्प लेते हैं।
राखी की तीन गांठें क्यों हैं खास?
तीन गांठों को केवल राखी बांधने की रस्म नहीं, बल्कि रिश्ते की मजबूती और शुभ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्मरण करते हुए राखी बांधना भाई के जीवन में सुख, सुरक्षा और समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है।
निष्कर्ष: राखी की तीन गांठों को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में मान्यताएं थोड़ी भिन्न हो सकती हैं। प्रमुख धार्मिक मान्यता में इन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश से जोड़ा जाता है, जबकि कुछ परंपराएं इन्हें मन, वचन और कर्म के संकल्प का प्रतीक मानती हैं। ये मान्यताएं धार्मिक आस्था और परंपरा पर आधारित हैं।



