हाई प्रोटीन डाइट से कब्ज क्यों? जानें अंडा-पनीर का असर

आजकल वजन कम करने और मसल्स बनाने के लिए लोग हाई प्रोटीन डाइट का सहारा लेते हैं। अंडा, पनीर, चिकन, मछली और प्रोटीन पाउडर डाइट का हिस्सा बन जाते हैं। हालांकि कुछ लोगों को इस बदलाव के बाद कब्ज, पेट भारी होने और मल त्याग में परेशानी की शिकायत हो सकती है।
दरअसल, प्रोटीन अपने आप कब्ज पैदा नहीं करता। समस्या तब बढ़ सकती है जब हाई प्रोटीन डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दाल जैसे फाइबर वाले खाद्य पदार्थ कम हो जाएं। कई पशु-आधारित प्रोटीन स्रोतों में फाइबर बहुत कम या नहीं होता।
पानी की कमी भी कब्ज की एक वजह बन सकती है। अगर प्रोटीन बढ़ाने के साथ पर्याप्त तरल पदार्थ नहीं लिया जाता और फाइबर भी कम रहता है, तो मल सख्त हो सकता है और उसे बाहर निकालने में परेशानी हो सकती है।
हाई प्रोटीन डाइट लेते समय हर भोजन को संतुलित रखना जरूरी है। अंडे या पनीर के साथ सब्जियां, सलाद, फल, दाल या साबुत अनाज जैसे फाइबर युक्त विकल्प शामिल किए जा सकते हैं। वयस्कों के लिए आम तौर पर रोज 22 से 34 ग्राम फाइबर की जरूरत बताई जाती है, हालांकि व्यक्तिगत जरूरत अलग हो सकती है।
अगर आप प्रोटीन पाउडर या प्रोटीन बार का इस्तेमाल करते हैं, तो उसका लेबल भी जरूर देखें। कुछ उत्पादों में फाइबर कम हो सकता है और कुछ लोगों में इनके अन्य ingredients से पेट संबंधी परेशानी हो सकती है।
नियमित शारीरिक गतिविधि भी पाचन और bowel movement को बेहतर रखने में मदद कर सकती है। इसलिए हाई प्रोटीन डाइट का मतलब केवल प्रोटीन बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रोटीन, फाइबर, पानी और एक्टिविटी के बीच संतुलन बनाना है।
अगर कब्ज लगातार बनी रहती है, बहुत ज्यादा दर्द होता है, मल में खून आता है या अचानक bowel habits में बड़ा बदलाव दिखता है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। डाइट में बड़े बदलाव या सप्लीमेंट शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।



