FSSAI Food Buzzwords: बैलेंस्ड मील से लोकल एंड सीजनल तक, जानें 3 जरूरी बातें

आज के समय में हेल्दी डाइट और बेहतर लाइफस्टाइल को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। इसी बीच खाने-पीने से जुड़े कई Buzzword भी लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं। FSSAI ने ऐसे तीन शब्दों का मतलब आसान तरीके से समझाया है, जिन्हें अपनी रोजमर्रा की डाइट से जोड़ा जा सकता है।
FSSAI के मुताबिक रोजाना की Food Choices पर थोड़ा ध्यान देने से संतुलित आहार बनाए रखने और हेल्दी वेट मैनेजमेंट को सपोर्ट करने में मदद मिल सकती है। संस्था का Eat Right India अभियान भी सुरक्षित, स्वस्थ और टिकाऊ भोजन की आदतों को बढ़ावा देता है।
पहला जरूरी संदेश है रोजाना के खाने में इस्तेमाल होने वाले तेल की मात्रा को करीब 10 प्रतिशत कम करना। इसका उद्देश्य पसंदीदा भोजन को पूरी तरह छोड़ना नहीं, बल्कि खाना बनाते समय तेल के इस्तेमाल में छोटा-सा बदलाव करना है। FSSAI भी खाने में तेल और वसा के सेवन को सीमित रखने की सलाह देता है।
तेल कम करने के लिए खाना बनाते समय नापकर तेल डालने की आदत अपनाई जा सकती है। डीप फ्राई करने की जगह भाप में पकाना, उबालना या रोस्ट करना जैसे विकल्प भी आजमाए जा सकते हैं। FSSAI की गाइडलाइन में भी फ्राइंग के बजाय इन तरीकों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।
दूसरा Buzzword है बैलेंस्ड मील यानी संतुलित भोजन। इसका मतलब ऐसा भोजन है जिसमें शरीर की जरूरत के मुताबिक अलग-अलग पोषक तत्वों और खाद्य समूहों का उचित संतुलन हो। FSSAI की जानकारी के अनुसार संतुलित डाइट में सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, फल, डेयरी और अन्य पोषक खाद्य पदार्थों की विविधता शामिल की जा सकती है।
एक संतुलित थाली में केवल स्वाद पर ध्यान देने के बजाय पोषण को भी प्राथमिकता देना जरूरी है। अलग-अलग रंगों और किस्म की सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और फल भोजन में विविधता ला सकते हैं। इससे रोज के खाने को ज्यादा पौष्टिक बनाने में मदद मिलती है।
तीसरा Buzzword है लोकल एंड सीजनल। इसका सीधा मतलब है अपने आसपास उपलब्ध और मौसम के अनुसार मिलने वाले खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करना। FSSAI अपने Eat Right India अभियान में भी स्थानीय और मौसमी खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देता है।
मौसमी फल और सब्जियां आमतौर पर अपने मौसम में आसानी से उपलब्ध होती हैं और ताजगी के लिहाज से भी बेहतर विकल्प हो सकती हैं। FSSAI की संतुलित आहार संबंधी सलाह में भी ताजे, रंग-बिरंगे, मौसमी और स्थानीय रूप से उपलब्ध फल-सब्जियों को शामिल करने की बात कही गई है।
लोकल और सीजनल खाने का एक फायदा यह भी है कि इससे स्थानीय खाद्य परंपराओं और उपलब्ध संसाधनों को बढ़ावा मिलता है। Eat Right India के Sustainable पहल में स्थानीय और मौसमी भोजन के साथ खाद्य बर्बादी कम करने और संसाधनों के संरक्षण पर भी जोर दिया गया है।
FSSAI ने #CRWM यानी Cook Right With Me का संदेश भी साझा किया है। इसका उद्देश्य रसोई में सही और सुरक्षित खाना पकाने की आदतों को बढ़ावा देना है। साफ-सफाई, सुरक्षित सामग्री का इस्तेमाल और खाना सही तरीके से पकाना रोजमर्रा की Food Safety का अहम हिस्सा हैं।
घर में खाना बनाते समय हाथों की सफाई, कच्चे और पके भोजन को अलग रखना और भोजन को सही तरीके से पकाना जैसी आदतें अपनाना जरूरी है। FSSAI की Food Safety at Home गाइड में भी कच्चे और पके खाद्य पदार्थों के बीच Cross-contamination से बचने और भोजन को अच्छी तरह पकाने पर जोर दिया गया है।
कुल मिलाकर, FSSAI के बताए ये Food Buzzword किसी मुश्किल डाइट की बजाय रोजमर्रा के भोजन में छोटे और व्यावहारिक बदलावों पर जोर देते हैं। कम तेल, संतुलित थाली और स्थानीय-मौसमी खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देकर खानपान को अधिक संतुलित और जागरूक बनाया जा सकता है।



