Lucknow Driving Licence: 14 सितंबर से DL टेस्ट होगा सख्त, 90 सेकंड में पूरा करना होगा ट्रैक

लखनऊ में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना अब पहले के मुकाबले ज्यादा चुनौतीपूर्ण होने जा रहा है। 14 सितंबर 2026 से नए ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग सेंटर में सख्त नियम लागू होंगे। दोपहिया वाहन चालकों को निर्धारित ट्रैक तय समय में पार करना होगा, जबकि चार पहिया वाहन चालकों के लिए भी अलग समय सीमा निर्धारित की गई है। टेस्ट में गलती होने पर सेंसर तुरंत अलर्ट करेंगे और असफल आवेदकों को दोबारा प्रशिक्षण लेना पड़ सकता है।
14 सितंबर से शुरू होगा नया टेस्टिंग सेंटर
लखनऊ के बंथरा में बने ड्राइविंग ट्रेनिंग एवं टेस्टिंग सेंटर (DTTI) को 14 सितंबर से शुरू करने की तैयारी है। परिवहन विभाग ने सेंटर संचालकों को 13 सितंबर तक सभी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
90 सेकंड में पार करना होगा H ट्रैक
नए टेस्ट की सबसे अहम बात समय सीमा है। दोपहिया वाहन चालकों को ऑटोमेटिक ट्रैक पर 90 सेकंड के भीतर H आकार का ट्रैक पार करना होगा। ट्रैक पर लगे सेंसर वाहन के निर्धारित सीमा से बाहर जाने या दूसरी गलती होने पर तुरंत बीप के जरिए अलर्ट देंगे।
चार पहिया वाहनों के लिए 3.82 मिनट
चार पहिया वाहन चालकों के लिए टेस्ट पूरा करने की समय सीमा 3.82 मिनट बताई गई है। वहीं बंथरा सेंटर से जुड़ी विस्तृत टेस्ट प्रक्रिया में 3 मिनट 50 सेकंड के टेस्ट के दौरान अलग-अलग ट्रैक चरण शामिल हैं।
8 आकार और पुल का भी देना होगा टेस्ट
टेस्टिंग ट्रैक को अंग्रेजी के ‘8’ आकार जैसा बनाया गया है। टेस्ट में 8 आकार का ट्रैक, H ट्रैक और अपहिल यानी पुल पार करने जैसी ड्राइविंग क्षमताओं की जांच होगी। इसका मकसद आवेदक की वास्तविक ड्राइविंग क्षमता को परखना है।
गलती पर सेंसर देंगे अलर्ट
ऑटोमेटिक टेस्टिंग ट्रैक में आधुनिक सेंसर लगाए गए हैं। वाहन अगर ट्रैक की सीमा से बाहर जाता है या टेस्ट के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं होता है तो सेंसर बीप के जरिए संकेत देंगे। इससे टेस्टिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने का प्रयास है।
फेल होने पर दोबारा ट्रेनिंग का प्रावधान
नए सिस्टम में टेस्ट में असफल होने वाले आवेदकों को दोबारा प्रशिक्षण लेना पड़ सकता है। सेंटर पर 45 दिन की ट्रेनिंग का भी प्रावधान है, जिसमें थ्योरी और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग शामिल होगी। प्रैक्टिकल प्रशिक्षण में सिम्युलेटर, वर्कशॉप और सड़क पर ड्राइविंग का अभ्यास कराया जाएगा।
पहले बायोमीट्रिक, फिर टेस्टिंग सेंटर
स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदकों को पहले ट्रांसपोर्टनगर या देवा रोड स्थित संबंधित एआरटीओ कार्यालय में बायोमीट्रिक और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद उन्हें ड्राइविंग टेस्ट के लिए बंथरा सेंटर जाना होगा।
बढ़ सकती है आवेदकों की परेशानी
बंथरा सेंटर की शुरुआती क्षमता करीब 198 वाहनों की प्रतिदिन बताई गई है। दूसरी ओर ट्रांसपोर्टनगर और देवा रोड एआरटीओ कार्यालयों में रोजाना बड़ी संख्या में स्थायी लाइसेंस के टेस्ट होते हैं। ऐसे में शुरुआत में टेस्टिंग की क्षमता और आवेदकों की संख्या के बीच अंतर के कारण पेंडेंसी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
आगे खुलेंगे चार टेस्टिंग सेंटर
आवेदकों की परेशानी कम करने के लिए लखनऊ में कुल चार ड्राइविंग ट्रेनिंग एवं टेस्टिंग सेंटर खोले जाने की योजना बताई गई है। इन केंद्रों के शुरू होने के बाद टेस्टिंग का दबाव अलग-अलग स्थानों पर बांटा जा सकेगा।
निष्कर्ष
लखनऊ में 14 सितंबर से ड्राइविंग लाइसेंस की टेस्टिंग प्रक्रिया तकनीक आधारित और पहले से ज्यादा सख्त होने जा रही है। दोपहिया चालकों के लिए 90 सेकंड में H ट्रैक पूरा करना अहम होगा, जबकि चार पहिया वाहनों के लिए अलग समय सीमा रहेगी। सेंसर आधारित निगरानी और अनिवार्य प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल लाइसेंस जारी करना नहीं, बल्कि सड़क पर बेहतर और सुरक्षित ड्राइविंग सुनिश्चित करना है।



