भारत के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी घटी, मिडिल ईस्ट से सप्लाई बढ़ी
भारत के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी जुलाई के रिकॉर्ड स्तर के बाद अगस्त में कम हो गई। जुलाई में रूस भारत के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 56% हिस्सा उपलब्ध करा रहा था, जबकि अगस्त में यह हिस्सेदारी करीब 44-45% के आसपास आ गई। रूसी कच्चे तेल का आयात करीब 2.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा।
रूस से तेल कम क्यों आया?
रूस से कम तेल आने के पीछे कई कारण हैं। एक तरफ रूसी निर्यात उपलब्धता पर दबाव रहा, वहीं दूसरी ओर चीन के रिफाइनरों ने भी रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई। रूस में ऊर्जा ढांचे पर यूक्रेनी हमलों और घरेलू ईंधन मांग को पूरा करने के लिए रिफाइनिंग बढ़ाने जैसे कारकों ने भी निर्यात योग्य मात्रा को प्रभावित किया।
इसके अलावा भारतीय रिफाइनरियां भविष्य में रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिकी प्रतिबंधों और संभावित व्यापारिक जोखिमों को भी ध्यान में रख रही हैं। इसी वजह से अक्टूबर और नवंबर की जरूरतों के लिए कुछ रिफाइनरियां स्पॉट मार्केट से वैकल्पिक सप्लाई तलाश रही हैं।
मिडिल ईस्ट से क्यों बढ़ी सप्लाई?
रूस से सप्लाई घटने के बीच भारत ने मध्य-पूर्वी देशों से खरीद बढ़ाई। अगस्त में इराक से भारत का कच्चे तेल का आयात करीब 25% बढ़कर 1.71 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया। सऊदी अरब से भी आयात में करीब 1.5% की वृद्धि दर्ज की गई।
यूएई की सरकारी कंपनी ADNOC ने भी तेल की शिपिंग व्यवस्था को मजबूत किया है। कंपनी फुजैरा और ओमान के सोहर जैसे ऐसे स्टोरेज और निर्यात टर्मिनलों से तेल भेज रही है जो हॉरमुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित हैं। इसके अलावा ADNOC पड़ोसी देशों, खासकर इराक से भी तेल खरीदकर आगे बेच रही है।
हॉरमुज संकट ने बदली खरीद रणनीति
भारत की तेल खरीद रणनीति पर हॉरमुज जलडमरूमध्य से जुड़ी परिस्थितियों का भी असर पड़ा है। पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से आने वाली सप्लाई और शिपिंग जोखिमों को लेकर अनिश्चितता बढ़ी। ऐसे में भारतीय रिफाइनरों ने रूस समेत दूसरे स्रोतों से उपलब्ध तेल की मात्रा बढ़ाई थी। अब मध्य-पूर्व के कुछ उत्पादकों द्वारा वैकल्पिक मार्गों से सप्लाई उपलब्ध कराने के कारण खरीद पैटर्न फिर बदल रहा है।
जुलाई में रूस पर रिकॉर्ड निर्भरता
अगस्त के बदलाव को समझने के लिए जुलाई के आंकड़े महत्वपूर्ण हैं। जुलाई 2026 में भारत ने रूस से रिकॉर्ड करीब 2.47-2.78 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया था और रूस की हिस्सेदारी 50% से अधिक हो गई थी।
अगस्त में रूसी सप्लाई घटने के साथ भारत का कुल कच्चे तेल का आयात भी कम हुआ। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अगस्त में भारत का कुल तेल आयात करीब 4.44 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा, जो जुलाई की तुलना में 8.8% कम था।
क्या रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है?
हां। अगस्त में कमी के बावजूद रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहा। उसके बाद संयुक्त अरब अमीरात और वेनेजुएला जैसे स्रोत रहे। सितंबर के शुरुआती अनुमानों में भी रूसी तेल आयात में और कमी की संभावना जताई गई है, हालांकि यह शुरुआती आंकड़ा है और इसमें बदलाव हो सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
भारतीय रिफाइनर आने वाले महीनों में अलग-अलग देशों से तेल की उपलब्धता, कीमत, शिपिंग लागत और प्रतिबंधों से जुड़े जोखिम को देखकर खरीद का फैसला कर सकते हैं। अमेरिकी नीति और रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर संभावित अतिरिक्त प्रतिबंध भी भारतीय कंपनियों की रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
इस बदलाव से यह संकेत मिलता है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी एक स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग आपूर्तिकर्ताओं के बीच खरीद को संतुलित कर रहा है। हालांकि, रूस की हिस्सेदारी में अगस्त की गिरावट को फिलहाल स्थायी बदलाव मानना जल्दबाजी होगी; आने वाले महीनों के आयात आंकड़े तस्वीर को और स्पष्ट करेंगे।



