बिहार के सत्तू की दुनिया में बढ़ी डिमांड

सत्तू बिहार की खानपान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे मुख्य रूप से भुने हुए चने को पीसकर तैयार किया जाता है और इसका इस्तेमाल पेय, लिट्टी की भरावन तथा कई अन्य व्यंजनों में किया जाता है। इसकी आसान तैयारी, लंबे समय तक रखने की सुविधा और पोषण संबंधी खूबियों ने इसे पारंपरिक भोजन से आगे एक संभावित हेल्थ फूड की पहचान दिलाई है।
बिहार में गर्मियों के मौसम में सत्तू की मांग लंबे समय से बनी रही है। 2026 में पटना में भीषण गर्मी के दौरान सत्तू की बिक्री में करीब 40 प्रतिशत तक वृद्धि की रिपोर्ट सामने आई थी। स्थानीय व्यापारियों के मुताबिक इसकी कीमत और उपलब्धता इसे लोगों के लिए पारंपरिक पेय का लोकप्रिय विकल्प बनाती है।
सत्तू की लोकप्रियता अब भारत के पारंपरिक बाजार से आगे बढ़कर हेल्थ और फिटनेस सेगमेंट तक पहुंच रही है। The Week की रिपोर्ट के अनुसार, भुने चने के आटे के रूप में पहचाना जाने वाला सत्तू फिटनेस पसंद करने वाले उपभोक्ताओं और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच जगह बना रहा है।
सत्तू को लेकर इसकी क्षेत्रीय पहचान को भी औपचारिक रूप देने की कोशिश हो रही है। भारत सरकार के Geographical Indications रिकॉर्ड में “Bihari Channa Sattu” के लिए आवेदन दर्ज है, जिसे बिहार चना सत्तू उत्पादक समिति ने अप्रैल 2025 में दाखिल किया था। मार्च 2026 में इस आवेदन से संबंधित दस्तावेज भी दर्ज किए गए हैं।
बिहार के सत्तू की कहानी पारंपरिक भारतीय खानपान और बदलती वैश्विक फूड पसंद के मेल को दिखाती है। कभी ग्रामीण और घरेलू भोजन का हिस्सा माना जाने वाला सत्तू अब पैकेज्ड फूड, हेल्थ ड्रिंक और फिटनेस डाइट जैसे नए बाजारों में भी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है।



