अब गाड़ियां सिलेक्ट करना होगा और आसान, माइलेज टेस्ट में AC का असर भी बताएंगी कंपनियां

अब गाड़ियां सिलेक्ट करना पहले से कहीं ज्यादा आसान होने वाला है। अब तक कार या बाइक खरीदते समय सबसे बड़ा सवाल माइलेज को लेकर होता था, लेकिन कंपनियां जो माइलेज बताती थीं, वह अक्सर वास्तविक परिस्थितियों से अलग होता था। खासकर जब एयर कंडीशनर (AC) चालू किया जाता था, तो माइलेज में कितना फर्क पड़ता है, इसकी सही जानकारी ग्राहकों को नहीं मिल पाती थी। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए अब माइलेज टेस्ट के नियमों में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। आने वाले समय में वाहन निर्माता कंपनियों को माइलेज टेस्ट के दौरान AC के असर की जानकारी भी साझा करनी होगी, जिससे ग्राहक ज्यादा समझदारी से गाड़ी का चुनाव कर सकेंगे।
दरअसल, अब तक माइलेज टेस्ट आदर्श परिस्थितियों में किए जाते थे, जहां AC बंद रहता था और सड़क व ट्रैफिक की स्थितियां भी नियंत्रित होती थीं। ऐसे में वास्तविक ड्राइविंग के दौरान मिलने वाला माइलेज इससे कम हो जाता था। नए नियमों के तहत कंपनियों को यह बताना होगा कि AC ऑन होने पर माइलेज कितना घट सकता है। इससे उपभोक्ताओं को यह अंदाजा लग सकेगा कि शहर की भीड़भाड़ और गर्मी में AC चलाने पर उनकी गाड़ी कितना ईंधन खर्च करेगी।
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उन ग्राहकों को होगा जो रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं या शहर में ज्यादा ड्राइविंग करते हैं। अब वे सिर्फ कागजों पर दिए गए माइलेज के आंकड़ों पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि वास्तविक उपयोग के करीब आंकड़ों के आधार पर फैसला ले सकेंगे। इससे इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड गाड़ियों की तुलना करना भी आसान हो जाएगा, क्योंकि उनमें भी AC के इस्तेमाल से रेंज पर असर पड़ता है।
ऑटो एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने वाला है और इससे कंपनियों पर भी दबाव रहेगा कि वे ज्यादा ईंधन-कुशल तकनीक विकसित करें। वहीं ग्राहकों का भरोसा भी बढ़ेगा, क्योंकि उन्हें सही और पूरी जानकारी मिलेगी। कुल मिलाकर, माइलेज टेस्ट में AC के असर को शामिल करना वाहन खरीद प्रक्रिया को ज्यादा व्यावहारिक, भरोसेमंद और आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।



